योगी सरकार की औद्योगिक और कौशल विकास आधारित नीतियों का असर अब जेलों में भी दिखाई देने लगा
कैदियों के हुनर ने बदली सेंट्रल जेल की तस्वीर,काष्ठ कला उद्योग की आय में 60 प्रतिशत वृद्धि
बंदियों को हुनर और रोजगार से जोड़ने की पहल ने जेल उद्योग को नया मुकाम दिलाया
अपराध की राह पर चलने वाले हाथ,अब श्रम ,कौशल और कला से समाज के लिए उपयोगी वस्तुएं तैयार कर प्रायश्चित की मिसाल पेश कर रहे
जेल में बने फर्नीचर का ऑर्डर सरकारी कार्यालयों,स्कूलों और कॉलेजों आदि स्थानों से लगातार मिल रहा
बंदी विशेष गवर्नर चेयर भी तैयार करते, जो बंदियों को उनके गुनाह की सजा सुनाते है, यानी जज के लिए भी कुर्सियां तैयार करते है कैदी
जेल का फर्नीचर उद्योग बंदियों के जीवन में आत्मविश्वास और सुधार के बदलाव की नई पटकथा लिख रहा
वाराणसी। योगी सरकार की औद्योगिक और कौशल विकास आधारित नीतियों का असर अब जेलों में भी दिखाई देने लगा है। जिससे सेंट्रल जेल का काष्ठ उद्योग आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है। बंदियों को हुनर और रोजगार से जोड़ने की पहल ने जेल उद्योग को नया मुकाम दिलाया है। सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों का हुनर अब जेल प्रशासन के लिए नई पहचान बनता जा रहा है। कभी अपराध की राह पर चलने वाले हाथ आज अपने श्रम ,कौशल और कला से समाज के लिए उपयोगी वस्तुएं तैयार कर प्रायश्चित की मिसाल पेश कर रहे हैं। वाराणसी सेंट्रल जेल के बंदी विभिन्न प्रकार के उपयोगी फर्नीचर बना रहे है। इन कैदियों के हाथों के हुनर से जेल के काष्ठ कला उद्योग में तैयार होने वाले फर्नीचर की मांग लगातार बढ़ रही है। इस उद्योग से जुड़े बंदी जब रिहा होकर अपने घर जाते हैं तो वह अपने साथ एक हुनर लेकर जाते हैं जो उनके परिवार के भरण पोषण का साधन बनते हैं।
सेंट्रल जेल के अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने बताया कि सेंट्रल जेल में बने फर्नीचर के ऑर्डर अब सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों आदि स्थानों से लगातार मिलते रहते हैं। जेल प्रशासन के अनुसार यहां तैयार होने वाले लकड़ी के उत्पादों में अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिससे उत्पादों की मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित होता है। बंदी, गवर्नर चेयर भी तैयार करते है। इतना ही नहीं, जो बंदियों को उनके गुनाह की सजा सुनाते है, यानी जज के लिए भी कुर्सियां और अन्य फर्नीचर तैयार किया जाता हैं। जेल का फर्नीचर उद्योग बंदियों के जीवन में आत्मविश्वास और सुधार के बदलाव की नई पटकथा लिख रहा है।
जेलर अखिलेश कुमार ने बताया कि जेल के काष्ठ कला उद्योग में करीब 80 बंदी कार्य कर रहे हैं। इन बंदियों की मेहनत और हुनर का परिणाम यह रहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में उद्योग की आय में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।जेल प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के उद्योग बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हुनर और श्रम के सहारे बंदी अब अपने अतीत की गलतियों को पीछे छोड़ नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।