ढोल-ताशों की थाप पर निकली लालबाग के राजा की विसर्जन यात्रा,  श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर दी विदाई 

चौक स्थित ठठेरी बाजार के शेरवाली कोठी (अग्रवाल भवन) में स्थापित प्रसिद्ध लालबाग के राजा (लालबाग के बादशाह) की छह फीट ऊंची प्रतिमूर्ति का पारंपरिक उल्लास और भव्यता के साथ विसर्जन किया गया। पांच दिवसीय गणेशोत्सव के समापन पर निकली विसर्जन शोभायात्रा में महाराष्ट्र की संस्कृति और काशी की धार्मिक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। ढोल-ताशों की गूंज, पुष्पवर्षा और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई दी।
 

महाराष्ट्र के 80 सदस्यीय ढोल-ताशा दल ने बांधा समां, ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से गूंजा ठठेरी बाजार

वाराणसी। चौक स्थित ठठेरी बाजार के शेरवाली कोठी (अग्रवाल भवन) में स्थापित प्रसिद्ध लालबाग के राजा (लालबाग के बादशाह) की छह फीट ऊंची प्रतिमूर्ति का पारंपरिक उल्लास और भव्यता के साथ विसर्जन किया गया। पांच दिवसीय गणेशोत्सव के समापन पर निकली विसर्जन शोभायात्रा में महाराष्ट्र की संस्कृति और काशी की धार्मिक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। ढोल-ताशों की गूंज, पुष्पवर्षा और गणपति बप्पा के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई दी।

शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण महाराष्ट्र से आया 80 सदस्यीय ढोल-ताशा दल रहा। दल के सदस्यों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जोशीली थाप से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोल-ताशों की गूंज के बीच श्रद्धालु उत्साह से झूमते नजर आए।

फूलों से सजे रथ पर निकले बप्पा
ऐतिहासिक चौक और ठठेरी बाजार की संकरी गलियों से जब फूलों से सजे भव्य रथ पर लालबाग के राजा की प्रतिमूर्ति निकली तो दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने बप्पा का स्वागत किया। श्रद्धालुओं और दुकानदारों ने पुष्पवर्षा कर गणपति को विदाई दी।

इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से गूंजता रहा। भक्तों ने हाथ जोड़कर बप्पा से सुख-समृद्धि की कामना की। पारंपरिक ढोल-ताशा वादन और भक्ति गीतों ने शोभायात्रा को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

मुंबई के कारीगर ने तैयार की थी प्रतिमा
समिति के अनुसार, लालबाग के राजा की छह फीट ऊंची विशेष प्रतिमूर्ति मुंबई से तैयार होकर वाराणसी लाई गई थी। इसका निर्माण उस मूर्तिकार के कारीगर ने किया था, जो मुंबई में मुख्य लालबागचा राजा की प्रतिमा तैयार करते हैं। इसी वजह से प्रतिमूर्ति श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

 

पांच दिन तक हुए धार्मिक आयोजन
गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को हुई थी। पांच दिनों तक चले उत्सव में प्रतिदिन महाआरती, भजन-कीर्तन और विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से पूजन-अर्चन कर विघ्नहर्ता का आशीर्वाद लिया। पांचवें दिन भव्य विसर्जन शोभायात्रा के साथ उत्सव का समापन हुआ। बप्पा की विदाई के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ भावुकता भी नजर आई। भक्तों ने अगले वर्ष फिर से आगमन की कामना करते हुए गणपति को विदाई दी।

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