पवित्र सावन मास की 30 जुलाई से होगी शुरुआत, बाबा विश्वनाथ के दर्शन को उमड़ेगा शिवभक्तों का रेला, इस बार बन रहा विशेष संयोग 

देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी अब सावन के स्वागत की तैयारियों में जुट गई है। महज 10 दिन बाद 30 जुलाई से श्रावण मास का शुभारंभ होगा। पूरे एक माह तक श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पूजन-अर्चन और दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होगा। कांवड़ियों के जत्थे बाबा विश्वनाथ का गंगाजल से अभिषेक करेंगे, वहीं द्वादश ज्योतिर्लिंग, पंचक्रोशी, केदारेश्वर अंतर्गृही प्रदक्षिणा समेत अनेक धार्मिक यात्राएं भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेंगी।
 

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी अब सावन के स्वागत की तैयारियों में जुट गई है। महज 10 दिन बाद 30 जुलाई से श्रावण मास का शुभारंभ होगा। पूरे एक माह तक श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पूजन-अर्चन और दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होगा। कांवड़ियों के जत्थे बाबा विश्वनाथ का गंगाजल से अभिषेक करेंगे, वहीं द्वादश ज्योतिर्लिंग, पंचक्रोशी, केदारेश्वर अंतर्गृही प्रदक्षिणा समेत अनेक धार्मिक यात्राएं भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेंगी।

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण वर्ष का पांचवां मास है और यह भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक रहेगा। पूरे माह काशी के मंदिरों में विशेष पूजन, भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी। प्रशासन और मंदिर समितियों ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

चार सोमवार, पांच-पांच बृहस्पतिवार और शुक्रवार का विशेष संयोग
इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को होगा। इसके अलावा पूरे माह में पांच-पांच बृहस्पतिवार और शुक्रवार का भी विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के सोमवार भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं, इसलिए इन दिनों मंदिरों में सबसे अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना है।

रुद्राभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन और महामृत्युंजय जाप का रहेगा विशेष महत्व
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्याधर्म विज्ञान संकाय के प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय ने बताया कि श्रावण मास में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक, सामूहिक पार्थिव शिवलिंग पूजन, बेलपत्र अर्पण, सावन सोमवार व्रत, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा शिवमहापुराण का श्रवण अत्यंत फलदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस मास में किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष आध्यात्मिक महत्व है और श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से भगवान शिव की आराधना करते हैं।

शिव यात्राओं के साथ निकलेंगी दुर्गा यात्राएं
बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत पंडित शिव प्रसाद पांडेय 'लिंगिया' ने बताया कि सावन भर काशी में शिव उपासना का विशेष वातावरण रहता है। इस दौरान पारंपरिक शिव यात्राओं के साथ दुर्गा यात्राएं निकालने की भी पुरानी परंपरा है। श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों में दर्शन कर पुण्य अर्जित करते हैं।

54 वर्षों से निकल रही हैं धार्मिक प्रदक्षिणा यात्राएं
धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य ब्रह्मलीन दंडी स्वामी शिवानंद सरस्वती द्वारा स्थापित काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति वर्ष 1972 से लगातार सावन में धार्मिक यात्राओं का आयोजन कर रही है। समिति के संचालक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि 2 अगस्त को श्री गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर से केदारेश्वर अंतर्गृही प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा निकलेगी। इस यात्रा में श्रद्धालु काशी के 145 प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक और दर्शन-पूजन करेंगे।

कांवड़ यात्रा और द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा का रहेगा आकर्षण
सावन के दौरान कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व रहेगा। गंगाजल लेकर आने वाले हजारों कांवड़िये बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसके साथ ही द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा, एकादश महारुद्र लिंग यात्रा, पंचक्रोशी यात्रा और अन्य धार्मिक यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

सावन मेले और धार्मिक कथाओं से गूंजेगी काशी
श्रावण मास में काशी के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक मेलों और कथाओं का भी आयोजन होगा। शिव महापुराण, श्रीमद्भागवत कथा, रामचरितमानस कथा और विष्णु पुराण कथा का आयोजन किया जाएगा। दुर्गाकुंड, सारंगनाथ, मार्कंडेय महादेव और शूलटंकेश्वर महादेव मंदिरों में पूरे सावन भर विशेष मेले लगेंगे। इन स्थलों पर जलाभिषेक, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

आस्था और भक्ति का संगम बनेगी काशी
श्रावण मास के दौरान काशी एक बार फिर शिवमय हो जाएगी। मंदिरों में "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष गूंजेंगे, गंगा तट से लेकर शिवालयों तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई देंगी। पूरे माह धार्मिक आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जिससे काशी का सांस्कृतिक और धार्मिक वैभव एक बार फिर पूरे देश के सामने प्रकट होगा।