राजातालाब का ऐतिहासिक रथयात्रा मेला, काशीराज परिवार का सगेजा दरबार, कुंवर अनंत नारायण रथ खींचकर रथयात्रा का करेंगे शुभारंभ 

रोहनिया क्षेत्र के राजातालाब में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथयात्रा और दो दिवसीय मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सदियों पुरानी इस परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण यह है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने की शुरुआत आज भी काशीराज परिवार का प्रतिनिधि ही करता है। पूर्व काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर रथ को दो पग खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद हजारों श्रद्धालु "हर-हर महादेव" के जयघोष के बीच रथ को भैरव तालाब स्थित मेला स्थल तक लेकर जाएंगे।
 

रिपोर्ट- ओमकारनाथ

वाराणसी। रोहनिया क्षेत्र के राजातालाब में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथयात्रा और दो दिवसीय मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सदियों पुरानी इस परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण यह है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने की शुरुआत आज भी काशीराज परिवार का प्रतिनिधि ही करता है। पूर्व काशीराज परिवार के कुंवर अनंत नारायण सिंह विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर रथ को दो पग खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद हजारों श्रद्धालु "हर-हर महादेव" के जयघोष के बीच रथ को भैरव तालाब स्थित मेला स्थल तक लेकर जाएंगे।

रथयात्रा की शुरुआत राजातालाब स्थित महाराज बलवंत सिंह महाविद्यालय परिसर से होगी, जो काशीराज परिवार के प्राचीन किले का हिस्सा है। यहां से रथ राजातालाब, कचनार, वीरभानपुर और ओदार होते हुए भैरव तालाब पहुंचेगा। भैरव तालाब स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ का रथ दो दिनों तक विराजमान रहेगा, जहां श्रद्धालु दर्शन-पूजन करेंगे।

रथ की मरम्मत और दरबार की तैयारियां पूरी
रथयात्रा से पहले पारंपरिक रथ की मरम्मत और सजावट का कार्य ठाकुर जी के मंदिर परिसर में कराया गया है। इस कार्य की देखरेख राजेश्वर नारायण सिंह ने की। उन्होंने बताया कि रथ को पूरी तरह दुरुस्त कर आकर्षक रूप दिया गया है ताकि यात्रा परंपरागत गरिमा के साथ संपन्न हो सके।

दूसरी ओर, राजातालाब के प्राचीन किले में काशीराज परिवार के दरबार को भी सजाया-संवारा गया है। रंग-रोगन के साथ क्षेत्र के सम्मानित नागरिकों को निमंत्रण भेजे जा चुके हैं। रथयात्रा से पहले कुंवर अनंत नारायण सिंह परंपरानुसार दरबार लगाते हैं, जहां क्षेत्र के लोगों से मुलाकात, कुशलक्षेम पूछने और नजराना स्वीकार करने की रस्म निभाई जाती है।

गांवों के लोगों को विशेष निमंत्रण
रथयात्रा में जक्खिनी, वीरभानपुर, मोतीकोट, बखरिया सहित आसपास के गांवों के लोगों को विशेष रूप से आमंत्रित करने की वर्षों पुरानी परंपरा है। स्थानीय लोगों के अनुसार काशीराज परिवार और ग्रामीणों के बीच यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक संवाद और आत्मीय संबंधों का भी प्रतीक है। दरबार में क्षेत्र के लोग अपनी समस्याएं और हालचाल साझा करते हैं।

हाथी पर सवार होकर पहुंचते हैं काशीराज परिवार के प्रतिनिधि
रथ को दो पग खींचने और पूजा-अर्चना के बाद कुंवर अनंत नारायण सिंह परंपरा के अनुसार हाथी पर सवार होकर भैरव तालाब स्थित मेला स्थल तक पहुंचते हैं। इस दौरान श्रद्धालु "हर-हर महादेव" के जयघोष से उनका स्वागत करते हैं। शुभारंभ के अवसर पर पुरोहितों एवं ब्राह्मणों को दक्षिणा देने की परंपरा का भी निर्वहन किया जाता है।

मेले में दिखेगी ग्रामीण संस्कृति की रौनक
दो दिवसीय रथयात्रा मेले में आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मेले में झूले, सर्कस, जादूगर, मौत का कुआं, बच्चों के मनोरंजन के साधन, खिलौने, गुब्बारे, मिठाइयों, ननखटाई और आम सहित अनेक प्रकार की दुकानें सजेंगी। श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ-साथ मेले का भी भरपूर आनंद उठाएंगे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रथयात्रा मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। रथयात्रा मेला सुरक्षा समिति के अध्यक्ष राजकुमार राजभर की देखरेख में वालंटियर तैनात रहेंगे। इसके अलावा राजातालाब, रोहनिया, जंसा, कपसेठी और मिर्जामुराद थानों की पुलिस के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे मेले में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

राजातालाब की यह ऐतिहासिक रथयात्रा धार्मिक आस्था, काशीराज परिवार की परंपरा और ग्रामीण संस्कृति का अद्भुत संगम मानी जाती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और सदियों पुरानी इस विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं।