दुर्गाकुंड पोखरे का फव्वारा तीन माह से खराब, विभागीय खींचतान में अटका मरम्मत का काम

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक दुर्गाकुंड मंदिर परिसर में स्थापित आकर्षक फव्वारा पिछले लगभग तीन महीनों से बंद पड़ा है। शाम ढलते ही रंगीन रोशनी और पानी की धाराओं से सजीव हो उठने वाला यह फव्वारा अब निष्क्रिय है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए इसकी शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है। 
 

रिपोर्ट- ओमकारनाथ
 

वाराणसी। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक दुर्गाकुंड मंदिर परिसर में स्थापित आकर्षक फव्वारा पिछले लगभग तीन महीनों से बंद पड़ा है। शाम ढलते ही रंगीन रोशनी और पानी की धाराओं से सजीव हो उठने वाला यह फव्वारा अब निष्क्रिय है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए इसकी शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है। 

दुर्गाकुंड के सौंदर्यीकरण अभियान के तहत इस फव्वारे की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था कि प्रकाश और जलधारा के संयोजन से मंदिर परिसर और कुंड क्षेत्र को और अधिक आकर्षक बनाया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। शुरुआती दिनों में यह फव्वारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा, लेकिन बीते तीन माह से इसकी मोटर और प्रकाश व्यवस्था ठप पड़ी है।

फव्वारे के रखरखाव और तकनीकी मरम्मत की जिम्मेदारी को लेकर नगर निगम के आलोक विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के बीच स्पष्ट समन्वय नहीं बन पाया है। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय न होने से मरम्मत कार्य लंबित है। परिणामस्वरूप फव्वारा खराब होने के बाद से ही उपेक्षित अवस्था में है।

इस मुद्दे को Live BNS News द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद नगर निगम ने फव्वारे और आसपास के क्षेत्र की सफाई तो कराई, लेकिन तकनीकी खराबी दूर नहीं हो सकी। इससे यह स्पष्ट है कि समस्या केवल गंदगी तक सीमित नहीं, बल्कि यांत्रिक और विद्युत संबंधी खामियों की भी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गाकुंड क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय निवासी आते हैं। ऐसे में फव्वारे का बंद रहना न केवल सौंदर्य पर असर डालता है, बल्कि शहर की छवि को भी प्रभावित करता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारी तय कर मरम्मत कर दी जाती, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक विभागीय उलझनों को सुलझाकर दुर्गाकुंड फव्वारे को दोबारा चालू करता है और क्षेत्र की खोई रौनक बहाल करता है।