बीएचयू में कथित गलत सर्जरी मामले की फिर होगी जांच, मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सीएमओ ने गठित की टीम
एक ही नाम की दो मरीजों के भर्ती होने से पहचान को लेकर भ्रम का आरोप, गलत मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाने और जांघ में चीरा लगाने की शिकायत
वाराणसी। आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में मरीज की कथित गलत सर्जरी किए जाने के मामले में अब नए सिरे से जांच शुरू हो गई है। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने जांच के लिए टीम गठित की है। टीम मरीज के भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल करेगी। इलाज, जांच, चिकित्सकीय परामर्श, भर्ती और शल्य चिकित्सा से जुड़े अभिलेख भी जांच के दायरे में होंगे।
इस मामले में आईएमएस बीएचयू प्रशासन की ओर से पहले आंतरिक जांच कराकर रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। हालांकि, शिकायतकर्ता ने जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने मामले की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया। आयोग ने जिलाधिकारी और सीएमओ को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इसी क्रम में सीएमओ स्तर से जांच शुरू की गई है।
एक ही नाम की दो मरीजों से हुआ भ्रम
मामला सात मार्च का बताया जा रहा है। बलिया निवासी 71 वर्षीय राधिका देवी रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर के उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर के न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती थीं। उनका उपचार प्रो. अनुराग साहू की देखरेख में चल रहा था और सात मार्च को उनकी सर्जरी प्रस्तावित थी। इसी दौरान राधिका देवी नाम की दूसरी महिला आर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती थीं। उनका उपचार प्रो. अमित रस्तोगी की देखरेख में चल रहा था। दोनों मरीजों का नाम एक जैसा होने के कारण पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति बनने का आरोप है।
गलत मरीज को ऑपरेशन थिएटर ले जाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक सात मार्च को कथित पहचान संबंधी चूक के चलते न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती राधिका देवी को आर्थोपेडिक्स की मरीज समझ लिया गया और ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। आरोप है कि उनकी जांघ में चीरा भी लगाया गया। इसी दौरान चिकित्सकों को स्थिति सामान्य से अलग नजर आई और मरीज की पहचान की दोबारा जांच की गई। जांच के बाद कथित तौर पर पता चला कि ऑपरेशन थिएटर में लाई गई महिला वह मरीज नहीं थी, जिसकी आर्थोपेडिक सर्जरी होनी थी। इसके बाद मामले की जानकारी सामने आई और अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
पहचान प्रक्रिया की भी होगी जांच
अब सीएमओ की ओर से गठित टीम मरीजों की भर्ती से लेकर ऑपरेशन की तैयारी तक की प्रक्रिया की जांच करेगी। इसमें भर्ती पर्चा, पहचान संबंधी दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, चिकित्सकों की सलाह, ऑपरेशन संबंधी कागजात और उपचार के दौरान दर्ज विवरणों का मिलान किया जाएगा। जांच टीम यह भी देखेगी कि ऑपरेशन से पहले मरीज की पहचान की पुष्टि के लिए निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं। गलत मरीज को ऑपरेशन थिएटर तक ले जाने और जांघ में चीरा लगाए जाने के आरोपों की भी उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर जांच होगी। जांच पूरी होने के बाद सीएमओ स्तर की टीम अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी और मानवाधिकार आयोग को भेजेगी। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।