119वें करपात्र प्राकट्योत्सव का शुभारंभ, एक लाख किशमिश से हुआ गणपति लक्षार्चन
धर्मसंघ मणि मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुरू हुआ सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान, प्रथम दिवस गणपति आराधना को समर्पित
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित श्रीधर्मसंघ (मणि मंदिर) परिसर में मंगलवार को सात दिवसीय 119वें करपात्र प्राकट्योत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिवस प्रथमेश गणपति की विशेष आराधना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और गणेश सहस्रनाम की आवृत्तियों के बीच एक लाख किशमिश (द्राक्षाफल) से गणपति का लक्षार्चन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गणेश लक्षार्चन के लिए सुबह नौ बजे मुख्य यजमान पंडित जगजीतन पाण्डेय ने विधि-विधान से गणपति पूजन शुरू किया। वैदिक आचार्यों और बटुकों ने चारों वेदों का स्वस्तिवाचन किया। इसके बाद गौरी-गणेश पूजन और वरुण कलश पूजन संपन्न कराया गया। पूजन के दौरान गणपति विग्रह का विभिन्न प्रकार से अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, मधु और शर्करा से तैयार पंचामृत से स्नान कराया गया। इसके बाद विभिन्न फलों के रस से फलोदक स्नान, गर्भोदक स्नान और पुष्पों से पुष्पोदक स्नान कराया गया। चंदन से गंधोदक स्नान तथा गंगाजल से अभिषेक के बाद गणपति का राजोपचार विधि से पूजन किया गया।
इसके पश्चात मुख्य यजमान और 21 भूदेवों ने विधिपूर्वक गणपति का आह्वान किया। गणेश सहस्रनाम में वर्णित 1008 नामों के उच्चारण के साथ गणपति को किशमिश अर्पित कर लक्षार्चन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरे परिसर में वैदिक मंत्रों और गणपति स्तुति की गूंज सुनाई देती रही। अंत में आरती और मंत्र पुष्पांजलि के साथ प्रथम दिवस का पूजन संपन्न हुआ।
इस अवसर पर धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गणपति को विघ्नहर्ता माना गया है। सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले गणपति की आराधना करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि गणेश लक्षार्चन को सनातन धर्म में विशेष धार्मिक अनुष्ठान माना गया है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इस अनुष्ठान से बाधाओं के दूर होने और मनोवांछित फल की प्राप्ति की धार्मिक मान्यता है।
महोत्सव के आगामी दिनों में भी धर्मसंघ परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सात दिवसीय करपात्र प्राकट्योत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।