एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया सुपारी किलर, कॉलोनाइजर हत्याकांड में रहा शामिल, एक लाख का था इनामी 

चौबेपुर ताना क्षेत्र के बरियासनपुर रिंग रोड के पास मंगलवार की रात एसटीएफ की टीम के साथ एक लाख के इनामी सुपारी किलर की मुठभेड़ हुई। खुद को घिरा देखकर बदमाश ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश को गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने उसे अस्पताल भेजा, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ में ढेर बदमाश गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट गांव निवासी बनारसी यादव सारनाथ में कॉलोनाइजर हत्याकांड में शामिल था। 
 

वाराणसी। चौबेपुर ताना क्षेत्र के बरियासनपुर रिंग रोड के पास मंगलवार की रात एसटीएफ की टीम के साथ एक लाख के इनामी सुपारी किलर की मुठभेड़ हुई। खुद को घिरा देखकर बदमाश ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश को गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने उसे अस्पताल भेजा, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ में ढेर बदमाश गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के गौरहट गांव निवासी बनारसी यादव सारनाथ में कॉलोनाइजर हत्याकांड में शामिल था। 

वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र स्थित अरिहंत नगर कॉलोनी फेज-2 में कॉलोनाइजर और व्यवसायी महेंद्र गौतम की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाइक सवार तीन बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि यह हत्या जमीन के बड़े विवाद से जुड़ी सुपारी किलिंग थी, जिसमें करीब पांच लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। इस हत्याकांड में मुख्य शूटर बनारसी यादव था, जबकि उसके साथ अरविंद यादव उर्फ फौजी और विशाल शामिल थे।

इस सनसनीखेज वारदात के बाद बनारसी करीब साढ़े पांच महीने तक फरार रहा। वाराणसी पुलिस और एसटीएफ की कई टीमें उसकी तलाश में लगी रहीं। मंगलवार की देर रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बारियासनपुर रिंग रोड पर एसटीएफ ने उसे घेर लिया। पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण के बजाय बनारसी ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हुआ और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। मौके से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए।

बनारसी यादव का आपराधिक इतिहास
शुरुआत में बनारसी यादव स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहा, मगर जल्दी ही उसने खुद को शार्पशूटर के तौर पर स्थापित कर लिया। सुपारी लेकर हत्या करना उसके लिए पेशा बन गया। हत्या, लूट और जबरन वसूली जैसे संगीन अपराधों में उसका नाम लगातार सामने आने लगा। वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र समेत कई जिलों में उसके खिलाफ 24 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। पुलिस ने उसे एक लाख रुपये का इनामी घोषित किया था, लेकिन वह लंबे समय तक कानून की पकड़ से दूर रहा।