बीएचयू में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के खिलाफ रात में धरने पर बैठे छात्र, एकतरफा कार्रवाई और उत्पीड़न का आरोप
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बिरला छात्रावास के छात्रों ने मंगलवार की रात प्रॉक्टोरियल बोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। दर्जनों की संख्या में छात्र छात्रावास के बाहर धरने पर बैठ गए और विश्वविद्यालय प्रशासन से न्याय की मांग की। छात्रों ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों पर दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। मामला 13 सितंबर को ट्रॉमा सेंटर में एक घायल छात्र के इलाज के दौरान हुए विवाद से जुड़ा है।
धरने पर बैठे छात्रों के मुताबिक, 13 सितंबर को एक साथी छात्र के घायल होने पर कुछ विद्यार्थी उसे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे। वहां इलाज नहीं होने की सूचना पर छात्रावास से अन्य छात्र भी पहुंच गए। इसी दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और बाद में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। छात्रों का कहना है कि घायल छात्र को पहले ही छात्रावास से बाहर कर दिया गया था।
मंगलवार को कुछ अन्य छात्रों को भी ईमेल के माध्यम से नोटिस मिले। इनमें उन पर मारपीट का आरोप लगाते हुए कार्रवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। छात्रों ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका दावा है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारी के कथित दुर्व्यवहार का वीडियो भी उनके पास मौजूद है। छात्रों ने कहा कि यदि जांच में वे दोषी नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
धरनास्थल के पास तेज रफ्तार कार से मची अफरातफरी
प्रदर्शन के दौरान छात्रावास के बाहर से एक तेज रफ्तार कार गुजरी। छात्रों के मुताबिक, कार की गति अधिक होने के कारण धरनास्थल पर बैठे विद्यार्थियों में अचानक अफरातफरी मच गई। छात्रों ने समय रहते खुद को संभाला, जिससे संभावित हादसा टल गया। कुछ छात्र कार का नंबर नोट कर शिकायत देने के लिए चीफ प्रॉक्टर कार्यालय पहुंचे। छात्रों का आरोप है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अधिकारी लगातार उन्हें डराने और दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।