बीएचयू बिरला छात्रावास की प्रस्तावित चहारदीवारी पर छात्रों का विरोध, विरासत संरक्षण की उठाई मांग

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बिरला छात्रावास में प्रस्तावित चहारदीवारी निर्माण को लेकर छात्रों ने विरोध जताया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे और कुलपति को संबोधित ज्ञापन छात्र अधिष्ठाता को सौंपते हुए निर्माण योजना में संशोधन की मांग की।
 

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के बिरला छात्रावास में प्रस्तावित चहारदीवारी निर्माण को लेकर छात्रों ने विरोध जताया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे और कुलपति को संबोधित ज्ञापन छात्र अधिष्ठाता को सौंपते हुए निर्माण योजना में संशोधन की मांग की।

छात्रों का कहना है कि बिरला छात्रावास केवल एक आवासीय परिसर नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका दावा है कि लगभग एक शताब्दी पूर्व प्रतिष्ठित उद्योगपति राजा बलदेव दास जुगल किशोर बिरला के सहयोग से निर्मित इस छात्रावास की अपनी विशिष्ट पहचान और स्थापत्य शैली है, जिसे किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे छात्र नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित चहारदीवारी से छात्रावास का मूल स्वरूप बदलने की आशंका है। छात्र नेता अभिषेक कुमार सिंह ने प्रशासन से मांग की कि यदि निर्माण कार्य आवश्यक है तो उसे छात्रावास की मूल वास्तुकला और ऐतिहासिक संरचना के अनुरूप ही कराया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बदलाव से पहले छात्रों और संबंधित पक्षों से चर्चा की जानी चाहिए।

छात्र नेता अभय सिंह ने बिरला छात्रावास को विश्वविद्यालय की धरोहर बताते हुए कहा कि इसकी पहचान और गरिमा को बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं हर्ष त्रिपाठी ने कहा कि छात्रावास को ऐसा स्वरूप नहीं दिया जाना चाहिए जिससे वह खुला और स्वतंत्र परिसर न रहकर प्रतिबंधित क्षेत्र जैसा प्रतीत हो। उनका मानना है कि प्रस्तावित निर्माण से छात्रावास का पारंपरिक वातावरण प्रभावित हो सकता है।

छात्र नेता रजत सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की भावना महात्मा मदन मोहन मालवीय के आदर्शों से जुड़ी हुई है। उन्होंने प्रशासन से इस विषय पर पुनर्विचार करने की अपील की। वहीं अभिषेक पाठक और शुभम सहित अन्य छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो छात्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।

इस दौरान शिवेश, रणबीर, मुरली, प्रिंस, संजय, राघव, शशांक, नीलेश, मुकेश, प्रदीप, सागर, गौरव, अमन, ज्ञानेंद्र सिंह, कृष्ण सिंह, रमन, मयंक सहित सैकड़ों छात्र मौजूद रहे। छात्रों ने प्रशासन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने और विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने की मांग की।