हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, बीएचयू बिड़ला ए के छात्रों ने सड़क जामकर किया प्रदर्शन 

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बिड़ला ‘ए’ छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों का आक्रोश शनिवार देर रात खुलकर सामने आया। पेयजल और साफ-सफाई की समस्या से परेशान छात्रों ने हॉस्टल से निकलकर बिड़ला चौराहा पर धरना शुरू कर दिया और सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया, जिससे आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित रहा।
 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बिड़ला ‘ए’ छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों का आक्रोश शनिवार देर रात खुलकर सामने आया। पेयजल और साफ-सफाई की समस्या से परेशान छात्रों ने हॉस्टल से निकलकर बिड़ला चौराहा पर धरना शुरू कर दिया और सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया, जिससे आसपास के इलाकों में यातायात प्रभावित रहा।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि छात्रावास में लंबे समय से पानी और स्वच्छता की समस्या बनी हुई है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। छात्रों का कहना है कि जब लगातार अनदेखी की गई, तब उन्हें मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा।

प्रदर्शन में शामिल छात्र अभिषेक सिंह ने बताया कि छात्रावास में करीब सौ कमरों में रहने वाले छात्रों के लिए पेयजल की व्यवस्था बेहद अपर्याप्त है। परिसर में लगा वाटर कूलर क्षमता के हिसाब से बहुत छोटा है, जिसके चलते महज आधे घंटे में ही पानी खत्म हो जाता है। इसके अलावा आरओ सिस्टम की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है, जिससे पानी की गुणवत्ता को लेकर छात्रों में चिंता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह समस्या सीधे तौर पर छात्रों के स्वास्थ्य से जुड़ी है।

छात्रों ने साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि छात्रावास के बाथरूम और शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही, जिससे गंदगी फैल रही है और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। छात्रों के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में कई बार वार्डन और प्रशासन को लिखित व मौखिक शिकायतें दीं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्याओं के समाधान का लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। छात्रों ने यह भी कहा कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।