किसान दिवस पर अधिकारियों की सख्त हिदायत, हर किसान तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, समस्याओं का त्वरित समाधान जरूरी

विकास भवन सभागार में बुधवार को किसान दिवस के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति और जनपद स्तरीय परियोजना प्रबंधक इकाई की समीक्षा भी की गई। बैठक में कृषि, पशुपालन, दुग्ध, सिंचाई, मत्स्य, सहकारिता, रेशम, वन, विद्युत विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि और जिले के सभी विकास खंडों से आए किसान उपस्थित रहे।
 

वाराणसी। विकास भवन सभागार में बुधवार को किसान दिवस के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस दौरान कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति और जनपद स्तरीय परियोजना प्रबंधक इकाई की समीक्षा भी की गई। बैठक में कृषि, पशुपालन, दुग्ध, सिंचाई, मत्स्य, सहकारिता, रेशम, वन, विद्युत विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि और जिले के सभी विकास खंडों से आए किसान उपस्थित रहे।

बैठक का संचालन जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने किया। उन्होंने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान आराजीलाइन विकास खंड के बसंतपुर गांव के किसान जितेंद्र नारायण सिंह और कनेरी गांव के विजय भान सिंह ने नलकूप की क्षतिग्रस्त नालियों के कारण सिंचाई में आ रही परेशानी की शिकायत की। इस पर संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल समस्या के समाधान के निर्देश दिए गए।

किसानों ने फसल बीमा योजना को लेकर भी सवाल उठाए। कुछ किसानों ने बताया कि उन्हें अभी तक बीमा राशि का भुगतान नहीं मिला है। इस पर बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग प्रक्रिया में आई समस्या के कारण भुगतान में देरी हुई है, लेकिन जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। वहीं पिंडरा विकास खंड के किसान शिव कुमार ने कृषि कार्य हेतु बिजली कनेक्शन की मांग रखी, जिस पर संबंधित अधिकारी ने उनका आवेदन तत्काल स्वीकार किया।

मुख्य विकास अधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे आगामी योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाएं और अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करें। पशुपालन विभाग ने जानकारी दी कि अंडा उत्पादन करने वाले किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुओं का नियमित टीकाकरण कराया जा रहा है।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत बकरी, भेड़ और सूकर पालन के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा हैचरी और साइलेज मेकिंग यूनिट जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी भारी सब्सिडी दी जा रही है। नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत नंदिनी और मिनी नंदिनी योजनाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें स्वदेशी नस्ल की गायों की इकाई स्थापना पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।

दुग्ध विभाग ने बताया कि प्रदेश में दुग्धशाला विकास एवं उत्पादन प्रोत्साहन योजना के जरिए नए उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं। वहीं रेशम विभाग ने बताया कि रेशम धागा बनाने की मशीनों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध है, जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की कि वे जल्द से जल्द फार्मर रजिस्ट्री कराएं, जिससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में मिल सके। उन्होंने बताया कि अप्रैल से सभी योजनाएं फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ जाएंगी और उर्वरक सब्सिडी भी सीधे खातों में ट्रांसफर की जाएगी।

बैठक में यह भी बताया गया कि राजकीय बीज भंडारों पर मक्का बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और इस माह के भीतर अनुदान भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। अंत में सभी अधिकारियों और किसानों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक का समापन किया गया।