राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक है सोमनाथ स्वाभिमान पर्व : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- राज्यपाल और मुख्यमंत्री सोमनाथ संकल्प महोत्सव में हुए शामिल
- संतों और धर्माचार्यों ने सनातन संस्कृति के संरक्षण पर किया मंथन
वाराणसी। काशी में सोमवार को आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ के दौरान सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना का भव्य संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। दोनों अतिथियों ने सबसे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ का विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
दर्शन-पूजन के बाद दोनों अतिथि मंदिर परिसर स्थित त्र्यंबकेश्वर सभागार में आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ कार्यक्रम में पहुंचे, जहां देशभर से आए संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, विद्वानों और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान सनातन संस्कृति के संरक्षण, आध्यात्मिक मूल्यों तथा राष्ट्र निर्माण में धार्मिक स्थलों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी पूरे देश की आस्था का केंद्र है और यहां की आध्यात्मिक परंपरा विश्व को भारतीय संस्कृति का संदेश देती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के प्राचीन तीर्थस्थलों का गौरव पुनर्स्थापित हो रहा है और सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं की सतत निगरानी की। मंदिर क्षेत्र में साफ-सफाई, बैरिकेडिंग और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।