काशी के करपात्री धाम में शुरू हुआ श्री विद्या कोटि कुमकुमार्चन महायज्ञ, 1100 माताएं कर रही पूजन

शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर काशी के केदारघाट स्थित करपात्री धाम में भव्य धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत हुई। स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता में आयोजित श्री विद्या कोटि कुमकुमार्चन महायज्ञ के पहले दिन 1008 माताओं ने पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से माता ललिता त्रिपुरसुंदरी का कुमकुम द्वारा पूजन-अर्चन किया।
 

वाराणसी। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर काशी के केदारघाट स्थित करपात्री धाम में भव्य धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत हुई। स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता में आयोजित श्री विद्या कोटि कुमकुमार्चन महायज्ञ के पहले दिन 1008 माताओं ने पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से माता ललिता त्रिपुरसुंदरी का कुमकुम द्वारा पूजन-अर्चन किया।

महायज्ञ के प्रथम सत्र में महिलाओं ने परंपरागत विधि से कुमकुम अर्चन करते हुए विश्व कल्याण और विश्व बंधुत्व की भावना का संदेश दिया। वहीं द्वितीय सत्र में माता ललिता त्रिपुरसुंदरी का विशेष श्रृंगार किया गया और भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तिरस से पूरा वातावरण गूंज उठा।

करपात्री धाम के व्यवस्थापक राहुल ने बताया कि इस वर्ष नवरात्र में कुल 1100 माताएं भगवती राजराजेश्वरी की आराधना कर रही हैं। यह परंपरा मूलतः दक्षिण भारत की है, जिसे करपात्री जी महाराज ने उत्तर भारत में प्रचलित किया। वर्तमान में करपात्री धाम पीठाधीश्वर स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती और उनके प्रतिनिधि अभिषेक ब्रह्मचारी जी महाराज इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष काशी में कोटी अर्चन का आयोजन लगातार तीन दिनों तक चलेगा। यह सातवां वर्ष है जब काशी में कुमकुम अर्चन का आयोजन हो रहा है। इस अनुष्ठान में शामिल होने वाली सभी माताएं और बहनें काशी की ही निवासी हैं, जो तीन दिनों तक निरंतर यहां आकर राजराजेश्वरी का पूजन करती हैं।

महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में एकता, भक्ति और समरसता का संदेश फैलाना भी है। कुमकुम अर्चन के दौरान उमड़ी आस्था और उत्साह ने करपात्री धाम को एक भव्य आध्यात्मिक केंद्र में तब्दील कर दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि नवरात्र के इन दिनों में यहां आकर पूजन करने से दिव्य शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है।