श्री काशी विश्वनाथ अन्नक्षेत्र पर एलपीजी संकट का असर नहीं, आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल, नियमित संचालित हो रहा अन्नक्षेत्र, रोजाना 15 हजार लोगों को मिल रहा प्रसाद 

देशभर में चल रही एलपीजी आपूर्ति की चुनौतियों के बीच श्री काशी विश्वनाथ धाम के अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के लिए भोजन व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। श्री विश्वनाथ न्यास ने आधुनिक तकनीक और वैकल्पिक संसाधनों को अपनाते हुए रसोईघर को अत्याधुनिक मशीनों और एलपीजी प्रणाली से सुसज्जित कर दिया है।
 

वाराणसी। देशभर में चल रही एलपीजी आपूर्ति की चुनौतियों के बीच श्री काशी विश्वनाथ धाम के अन्नक्षेत्र में श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों के लिए भोजन व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। श्री विश्वनाथ न्यास ने आधुनिक तकनीक और वैकल्पिक संसाधनों को अपनाते हुए रसोईघर को अत्याधुनिक मशीनों और एलपीजी प्रणाली से सुसज्जित कर दिया है।

धाम के अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 15 हजार लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। इसमें संस्कृत विद्यालयों के छात्र, सरकारी अस्पतालों के मरीज और उनके परिजन, दंडी स्वामी तथा दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु शामिल हैं। एलपीजी की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए रसोई में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उन्नत कुकिंग सिस्टम को भी शामिल किया गया है, जिससे भोजन बनाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।

न्यास के अनुसार, वर्तमान में धाम में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर गैस की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे अन्नक्षेत्र की सेवा लगातार जारी है। प्रशासन और न्यास के समन्वय से यह व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो गई है। रसोईघर में लगाए गए आधुनिक उपकरण न केवल कार्य को तेज और सरल बना रहे हैं, बल्कि स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों को भी उच्च स्तर पर बनाए रखने में सहायक हैं। 

श्री काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि भगवान विश्वनाथ के धाम में मां अन्नपूर्णा की कृपा से कोई संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं हो सकती। महादेव की कृपा से अन्नक्षेत्र निरंतर संचालित हो रहा है। एपीजी की कोई कमी नहीं है। यहां सबसे बड़ा अन्नक्षेत्र धाम संचालित कर रहा है। 

उन्होंने बताया कि एक अन्नक्षेत्र धाम में संचालित होता है, जहां रोजाना तीन से पांच हजार श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता है। वहीं दूसरा अन्नक्षेत्र टेढ़ीनीम में संचालित होता है। यहां से पैक भोजन संस्कृत विद्यालयों में बटुकों, अस्पतालों में रोगियों को भेजा जाता है। दंड़ी स्वामी यहां आकर भोजन करते हैं। रोजाना लगभग 15 हजार से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। 

उन्होंने बताया कि भोजन बनाने में शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है। स्नान करके बिना लहसुन-प्याज के भोजन पकाया जाता है। दरअसल, दंडी स्वामी यहां आकर भोजन करते हैं, इसलिए उनके साथ शर्तें होती हैं कि शुद्धता और वैदिक रीतियों का पूरा ध्यान रखा जाए। मंदिर न्यास इसका पूरा पालन करते हुए भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। 

 

अन्नक्षेत्र के प्रबंधक शोभित पाठक ने बताया कि अन्नक्षेत्र में साफ-सफाई और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है। अन्नक्षेत्र में अनाज धोने, सब्जी धोने और काटने आदि के लिए मशीनें लगी हैं। मैनपावर को सिर्फ सपोर्ट के लिए रखा गया है। उन्होंने कहा कि अन्नक्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले तेल, ग्रोसरी आदि के मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। उत्तम क्वालिटी की सामग्री ही मंगाई जाती है।
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