गौरक्षा को लेकर बड़ा आह्वान: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन की घोषणा
वाराणसी। देवरिया में आयोजित ‘गविष्टि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध)’ के तीसरे दिन वैकुंठपुर स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ रक्षा को लेकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक विमर्श प्रस्तुत किया। उनके संबोधन को लेकर क्षेत्र में खासा चर्चा का माहौल है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, विद्वान, संस्कृत छात्र और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इससे पूर्व यात्रा मुंडेरा बाबू, बंजरिया चौराहा, कंचनपुर चौराहा, कसया रोड, सोनुघाट चौराहा और लक्ष्मी नारायण मंदिर-शिवबनकटा जैसे विभिन्न स्थानों से होकर गुजरी, जहां लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया और गौ रक्षा का संकल्प लिया।
शंकराचार्य ने कहा कि गौ रक्षा केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज का मूल दायित्व है। उन्होंने मांग उठाई कि “गौ माता” को “राष्ट्र माता” घोषित किया जाना चाहिए और इसके लिए सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में बीफ निर्यात का मुद्दा गंभीर चिंता का विषय है और इसे लेकर ठोस नीति बननी चाहिए। उन्होंने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की विचारधाराओं की आलोचना करते हुए कहा कि इनमें से कोई भी भारतीय सनातन मूल्यों पर आधारित राजनीति नहीं कर रहा है।
शंकराचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि संत समाज सीधे राजनीति में भागीदारी नहीं करता, लेकिन जो गृहस्थ सनातनी विचारधारा को मानते हैं, उन्हें राजनीति में आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी सनातन परंपरा से जुड़ी होने के बावजूद संगठित नेतृत्व के अभाव में प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रही है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया गाय को राज्य माता का दर्जा दिया जाए और उसे पशु सूची से हटाकर एक अलग सम्मानजनक श्रेणी में रखा जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में इस दिशा में कदम उठाए गए हैं और वहां किसी तरह की कानूनी बाधा नहीं आई।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 24 जुलाई को लखनऊ में एक बड़े आयोजन की घोषणा की, जहां देशभर से समर्थकों के जुटने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि यदि 81 दिनों की यात्रा के बाद भी सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आगे की रणनीति इसी मंच से तय की जाएगी।
गोष्ठी के अंत में वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक शपथ दिलाई गई, जिसमें उपस्थित लोगों ने गौ रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प लिया। आयोजकों के अनुसार, यह अभियान समाज में जागरूकता बढ़ाने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।