काशी में 236 साल पुराने जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का शिलान्यास, शंकराचार्य ने रखी आधारशिला
वाराणसी। धर्म नगरी काशी में आस्था और परंपरा का ऐतिहासिक संगम देखने को मिला, जब अस्सी क्षेत्र स्थित प्राचीन Shri Jagannath Temple Assi के जीर्णोद्धार हेतु भव्य शिला पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम संपन्न हुआ। कांची कामकोटि पीठ के Shankaracharya Swami Shankara Vijayendra Saraswati ने वैदिक विधि-विधान के साथ मंदिर पुनर्निर्माण की आधारशिला रखी। इस आयोजन ने काशी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को एक नई दिशा दी है।
“विश्वनाथ और जगन्नाथ एक ही हैं”, शंकराचार्य का संदेश
समारोह को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि काशी में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर बनना लंबे समय से श्रद्धालुओं की आकांक्षा रही है, जो अब साकार हो रही है। उन्होंने Kashi Vishwanath Temple और भगवान जगन्नाथ को एक ही स्वरूप बताते हुए कहा कि दोनों का उद्देश्य समाज का कल्याण है। उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्रसम्मत परिवर्तन हमेशा समाज के लिए लाभकारी होता है, जबकि शास्त्रों के विपरीत परिवर्तन समाज को नुकसान पहुंचाता है। इस मंदिर के पुनर्निर्माण से सनातन धर्म की एकजुटता और सामाजिक विकास को बल मिलेगा।
1790 में बने मंदिर को मिलेगा नया भव्य स्वरूप
ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने बताया कि वर्ष 1790 में निर्मित इस ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्निर्माण सनातन परंपरा के गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल निर्माण नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा को सुदृढ़ करने का माध्यम है। ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने जानकारी दी कि 1802 से यहां रथ यात्रा मेले का आयोजन निरंतर होता आ रहा है और अब मंदिर का नया स्वरूप इस परंपरा को और मजबूत करेगा।
मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं का भी होगा विकास
पुनर्निर्माण के बाद मंदिर परिसर में वेद शिक्षा की व्यवस्था, धर्मशाला और श्रद्धालुओं के लिए भोजनालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे न केवल धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
अस्सी घाट से निकली भव्य कलश यात्रा, भक्तिमय हुआ माहौल
शिलान्यास कार्यक्रम से पहले सुबह अस्सी घाट से मातृशक्ति द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं सिर पर मंगल कलश लेकर चल रही थीं और डमरू दल के वादन के साथ धार्मिक वातावरण और भी जीवंत हो गया। यह यात्रा अस्सी घाट से मंदिर परिसर तक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
108 कर्मयोगियों का सम्मान, बड़ी संख्या में जुटे गणमान्य लोग
कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 108 कर्मयोगियों को शंकराचार्य के हाथों सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कई धर्माचार्य, समाजसेवी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई।
काशी में सनातन परंपरा को नई ऊर्जा
यह शिलान्यास केवल एक मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपरा को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र के रूप में उभरेगा।
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