सीर गोवर्धनपुर में तीन दिन से सड़क पर बह रहा सीवर का गंदा पानी, स्थानीय लोगों के लिए बढ़ी परेशानी, आंदोलन की दी चेतावनी
वाराणसी। सीरगोवर्धनपुर क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो की गंभीर समस्या से स्थानीय लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली के रूप में देशभर में पहचान रखने वाले इस इलाके में पिछले तीन दिनों से रविदास पार्क के पास सीवर का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। लगातार ओवरफ्लो हो रहे सीवर के कारण पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र पहले से ही टूटी सड़कों, जलभराव और साफ-सफाई की समस्याओं से जूझ रहा है। अब सीवर का गंदा पानी सड़क पर बहने से हालात और बदतर हो गए हैं। सड़क से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों के पहियों से गंदा पानी उछलकर राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। कई घरों के सामने सीवर का पानी जमा हो गया है, जबकि कुछ मकानों तक भी यह पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार नगर निगम और संबंधित विभाग के अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका कहना है कि केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को टाल दिया जाता है, जबकि सीवर व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। लोगों ने आशंका जताई है कि बरसात के मौसम में गंदे पानी के जमा होने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट पैदा होने की संभावना से क्षेत्रवासी चिंतित हैं।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी कहा कि सीरगोवर्धनपुर राष्ट्रीय और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। गुरु रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई केंद्रीय और प्रदेश स्तरीय जनप्रतिनिधि यहां आते हैं। इसके बावजूद क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी किए जाने से लोगों में गहरा असंतोष है।
क्षेत्रवासियों ने नगर निगम से तत्काल सीवर लाइन की सफाई, ओवरफ्लो की समस्या का स्थायी समाधान और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
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