दर्पण में सफेद बाल देख दशरथ ने राम को युवराज बनाने का लिया निर्णय, लाट भैरव की प्राचीन रामलीला के दूसरे दिन राजगद्दी की तैयारी का मंचन, अयोध्या में छाया हर्ष

श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम काशी के तत्वावधान में चल रही रामलीला के दूसरे दिन सोमवार को स्वरूप शृंगार और राजगद्दी की तैयारी का प्रसंग मंचित किया गया। विशेश्वरगंज स्थित लीलास्थल पर रामायण मंडली ने प्रथमेश की वंदना के साथ लीला का शुभारंभ किया। इस दौरान भगवान राम का गुरु वशिष्ठ के प्रति समर्पण और श्रद्धा का भाव प्रमुखता से उभरा।
 

वाराणसी। श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम काशी के तत्वावधान में चल रही रामलीला के दूसरे दिन सोमवार को स्वरूप शृंगार और राजगद्दी की तैयारी का प्रसंग मंचित किया गया। विशेश्वरगंज स्थित लीलास्थल पर रामायण मंडली ने प्रथमेश की वंदना के साथ लीला का शुभारंभ किया। इस दौरान भगवान राम का गुरु वशिष्ठ के प्रति समर्पण और श्रद्धा का भाव प्रमुखता से उभरा।

लीला प्रसंग के अनुसार, राजा दशरथ ने एक दिन दर्पण में अपने कानों के पास सफेद बाल देखे। इसके बाद उन्हें अपने जीवन की बढ़ती उम्र का अहसास हुआ और उन्होंने सूर्यवंश के कुल गौरव श्रीराम को युवराज पद सौंपने का निर्णय लिया। राजा दशरथ ने राज्यसभा में गुरुजनों और मंत्रियों के समक्ष राम को युवराज बनाने का प्रस्ताव रखा। राजा दशरथ के इस निर्णय की सूचना मिलते ही अयोध्या में खुशी का माहौल बन गया। नगरवासियों में उत्साह छा गया और सभी श्रीराम के युवराज बनने की तैयारी में जुटते दिखाई दिए। लीला में अयोध्या के लोगों की प्रसन्नता और रामराज्य की कल्पना से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया।

मंचन के दौरान व्यास दयाशंकर त्रिपाठी और सहायक व्यास पंकज त्रिपाठी हाथों में रामचरितमानस की प्रति लेकर प्रसंगानुसार लीला का संयोजन करते रहे। संवाद और मंचन के माध्यम से प्रसंगों को आगे बढ़ाया गया। मंगलवार को कैकेयी के कोपभवन जाने और उससे जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। समिति के प्रधानमंत्री कन्हैयालाल यादव (एडवोकेट), उपाध्यक्ष मनोज यादव, केवल कुशवाहा, संतोष साहू, श्यामसुंदर, मुरलीधर पांडेय, रामप्रसाद मौर्य, गोविंद विश्वकर्मा, शिवम अग्रहरि, जयप्रकाश राय, महेंद्र सिंह, चंद्रिका प्रसाद, उत्कर्ष कुशवाहा, कामेश्वर पाठक, ओमप्रकाश प्रजापति, कुशाग्र, हरि विट्ठल, अनुराग और संतुष्ट आदि मौजूद रहे।