गंगा घाटों की सुरक्षा और पुख्ता, छह माह में 60% बढ़ा जल पुलिस बल, पीली वर्दी और आधुनिक संसाधनों से बढ़ी निगरानी
वाराणसी। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वाराणसी जल पुलिस को पिछले छह महीनों में उल्लेखनीय रूप से सशक्त किया गया है। इस अवधि में जल पुलिस के बल में करीब 60 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पहले जहां इस इकाई में 22 जवान तैनात थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 37 हो गई है। अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती, आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों की उपलब्धता, विशेष प्रशिक्षण और प्रदेश में पहली बार मिली पीले रंग की विशिष्ट वर्दी ने जल पुलिस की कार्यक्षमता को नई पहचान और मजबूती प्रदान की है।
वाराणसी जल पुलिस उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी इकाई बन गई है, जिसे विशेष रूप से पीले रंग की वर्दी उपलब्ध कराई गई है। यह वर्दी नदी में राहत एवं बचाव अभियान के दौरान जवानों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करती है और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई को भी आसान बनाती है।
15 नए पुलिसकर्मी शामिल, संख्या बढ़कर 22 से हुई 37
बल विस्तार के तहत जल पुलिस में 15 नए जवानों की तैनाती की गई है। पहले दो सब इंस्पेक्टर, छह हेड कांस्टेबल, दस कांस्टेबल और चार नाव चालक सहित कुल 22 कर्मी कार्यरत थे। अब दो अतिरिक्त सब इंस्पेक्टर, दो हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबलों की नियुक्ति के बाद कुल संख्या 37 हो गई है। इससे घाटों पर गश्त, निगरानी और रेस्क्यू ऑपरेशन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो गए हैं।
घाटों पर स्थापित की गईं 22 जेटी
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रमुख स्नान घाटों पर 22 जेटी स्थापित की गई हैं। इन जेटियों के माध्यम से जल पुलिस की टीमें गंगा में लगातार निगरानी रखती हैं और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर देती हैं। साथ ही जल पुलिस को आधुनिक लाइफ सेविंग और रेस्क्यू उपकरणों से भी लैस किया गया है, जिससे दुर्घटनाओं के दौरान प्रतिक्रिया का समय काफी कम हुआ है।
जल पुलिस ने एक साल में 84 लोगों की बचाई जान
बढ़े संसाधनों का सकारात्मक परिणाम भी सामने आया है। पिछले एक वर्ष में जल पुलिस ने गंगा में डूब रहे 84 लोगों की जान बचाई है। हाल ही में आयोजित निर्जला एकादशी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया, लेकिन जल पुलिस की सतर्कता और प्रभावी निगरानी के चलते डूबने की कोई घटना सामने नहीं आई।
आधुनिक संसाधनों से और प्रभावी हुआ राहत और बचाव कार्य
प्रभारी जल पुलिस सुजीत त्रिपाठी ने बताया कि बढ़े हुए पुलिस बल और आधुनिक संसाधनों से राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी आवश्यक है, ताकि महिला श्रद्धालुओं से जुड़े मामलों में बेहतर सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। आगामी सावन, गंगा दशहरा, देव दीपावली और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए जल पुलिस को और अधिक संसाधन सम्पन्न बनाने की दिशा में भी तैयारियां जारी हैं।