विज्ञान रटने का विषय नहीं, समझने और प्रकृति से सवाल पूछने की प्रक्रिया, प्रोफेसर एचसी वर्मा ने रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाए भौतिकी के जटिल नियम  

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज्ञान संस्थान स्थित महामना सभागार में शुक्रवार को विज्ञान, शोध और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम देखने को मिला। इस दौरान विज्ञान पत्रिका ‘अचिंत्य 5.0: महिला विशेषांक’ के लोकार्पण हुआ। देश के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी  प्रोफेसर एचसी वर्मा  ने रोजमर्रा के उदाहरणों से भौतिकी के जटिल नियमों को समझाया। 
 

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विज्ञान संस्थान स्थित महामना सभागार में शुक्रवार को विज्ञान, शोध और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम देखने को मिला। इस दौरान विज्ञान पत्रिका ‘अचिंत्य 5.0: महिला विशेषांक’ के लोकार्पण हुआ। देश के प्रख्यात भौतिक विज्ञानी  प्रोफेसर एचसी वर्मा  ने रोजमर्रा के उदाहरणों से भौतिकी के जटिल नियमों को समझाया। 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। छात्रा साक्षी ने कार्यक्रम का प्रभावी संचालन किया। हिंदी प्रकाशन समिति द्वारा प्रकाशित ‘अचिंत्य 5.0’ के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह अंक विशेष रूप से “विज्ञान में महिलाएं” विषय पर केंद्रित है। इसमें मैरी क्यूरी से लेकर भारत की प्रमुख महिला वैज्ञानिकों और चंद्रयान-3 मिशन की महिला वैज्ञानिकों की प्रेरक कहानियों को शामिल किया गया है।

लोकार्पण समारोह में कुलपति एवं अन्य अतिथियों ने पत्रिका के साथ-साथ इसके विभिन्न भाषाई संस्करणों का भी विमोचन किया। वक्ताओं ने कहा कि मातृभाषा में विज्ञान का प्रसार वैज्ञानिक सोच को जन-जन तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने महिला वैज्ञानिकों के योगदान को रेखांकित करते हुए छात्राओं को STEM क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रो. एच.सी. वर्मा का विशेष व्याख्यान रहा, जिसने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया। करीब दो घंटे तक चले अपने संबोधन में उन्होंने भौतिकी के जटिल सिद्धांतों को रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से सरल ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि विज्ञान रटने का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति को समझने और सवाल पूछने की प्रक्रिया है।

प्रो. वर्मा ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने ‘कॉन्सेप्ट्स ऑफ फिजिक्स’ जैसी प्रसिद्ध पुस्तक लिखी, जिसे तैयार करने में आठ वर्ष लगे। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे पैकेज के पीछे भागने के बजाय अपने कॉन्सेप्ट मजबूत करें और जिज्ञासा को जीवित रखें।

व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने क्वांटम मैकेनिक्स, ब्रह्मांड विज्ञान और करियर से जुड़े सवाल पूछे, जिनका प्रो. वर्मा ने सहज और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उत्तर दिया। कार्यक्रम में ‘मैं भी विज्ञान संचारक’ अभियान के तहत सेल्फी प्वाइंट भी आकर्षण का केंद्र रहा। अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।