सावन स्पेशल : गंगा-गोमती संगम पर विराजते हैं बाबा मार्कंडेय महादेव, सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब, अकाल मृत्यु के भय से मिलती है मुक्ति 

गंगा और गोमती के पावन संगम के निकट स्थित कैथी का मार्कंडेय महादेव मंदिर काशी की धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। ऋषि मार्कंडेय और भगवान शिव की पौराणिक कथा से जुड़े इस धाम में सावन के सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त संगम में स्नान के बाद बाबा का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि, आरोग्य, संतान और दीर्घायु की कामना करते हैं।
 

संतान प्राप्ति और आरोग्य की कामना लेकर दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप, बाबा की आराधना से दूर होते हैं संकट, सुख-शांति की होती है प्राप्ति 

गंगा-गोमती के संगम स्थल पर स्थित होने से मंदिर की है विशेष मान्यता, ऋषि मार्कंडेय की तपस्या से जुड़ा है मंदिर का पौराणिक इतिहास 

रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। गंगा और गोमती के पावन संगम के निकट स्थित कैथी का मार्कंडेय महादेव मंदिर काशी की धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान रखता है। ऋषि मार्कंडेय और भगवान शिव की पौराणिक कथा से जुड़े इस धाम में सावन के सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त संगम में स्नान के बाद बाबा का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि, आरोग्य, संतान और दीर्घायु की कामना करते हैं।

पौराणिक कथा में मिलता है मृत्यु पर विजय का संदेश
धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋषि मार्कंडेय को अल्पायु का वरदान मिला था। उन्होंने भगवान शिव की कठोर आराधना की। जब उनकी निर्धारित आयु पूरी हुई और यमराज उनके प्राण लेने पहुंचे, तो मार्कंडेय शिवलिंग से लिपट गए। मान्यता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव कालांतक रूप में प्रकट हुए और अपने भक्त की रक्षा की। इसी कथा के कारण मार्कंडेय महादेव को मृत्यु के भय से मुक्ति प्रदान करने वाला शिवस्वरूप माना जाता है।

गंगा-गोमती संगम बढ़ाता है धाम का महत्व
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक और आध्यात्मिक परिवेश है। गंगा और गोमती के संगम के निकट स्थित होने के कारण यहां स्नान और शिव आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मंदिर के समीप स्थित मार्कंडेय घाट और दोनों नदियों का मनोहारी परिवेश श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराता है।


सावन में हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंजता है कैथी
सावन भगवान शिव की आराधना का विशेष महीना माना जाता है। प्रत्येक सोमवार को बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंज उठता है। सावन के अलावा महाशिवरात्रि और प्रदोष जैसे पर्वों पर भी यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।


महामृत्युंजय साधना से जुड़ी है मान्यता
ऋषि मार्कंडेय की कथा का संबंध महामृत्युंजय मंत्र की साधना से भी जोड़ा जाता है। इसी कारण भक्त यहां महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन कराते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा की आराधना जीवन के संकटों से रक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करती है।


स्थानीय धार्मिक परंपरा में मार्कंडेय महादेव को अत्यंत सिद्ध और प्रभावशाली शिवधाम माना जाता है। कई श्रद्धालु इसकी महिमा की तुलना द्वादश ज्योतिर्लिंगों से करते हैं। हालांकि मार्कंडेय महादेव भारत के आधिकारिक द्वादश ज्योतिर्लिंगों की सूची में शामिल नहीं हैं, इसलिए इसे धार्मिक लोकमान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


प्राचीन आस्था, लेकिन निश्चित निर्माण काल अस्पष्ट
मंदिर की प्राचीनता को लेकर धार्मिक और स्थानीय परंपराओं में कई मान्यताएं हैं। इसे ऋषि मार्कंडेय की तपस्या से जुड़ा प्राचीन शिवपीठ माना जाता है। हालांकि मंदिर की वर्तमान संरचना की निश्चित निर्माण तिथि को प्रमाणित करने वाले स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसकी धार्मिक प्रतिष्ठा मुख्य रूप से पौराणिक कथा, गंगा-गोमती संगम और सदियों से चली आ रही लोकआस्था पर आधारित है।


आस्था, संगम और पुराण का अनूठा संगम
कैथी का मार्कंडेय महादेव धाम काशी की धार्मिक परंपरा को एक अलग विस्तार देता है। यहां गंगा-गोमती का संगम, ऋषि मार्कंडेय की अमर भक्ति और भगवान शिव के कालांतक स्वरूप की कथा एक साथ दिखाई देती है। सावन में यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। कोई यहां अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना लेकर पहुंचता है, तो कोई संतान, स्वास्थ्य और सुख-शांति की कामना से। यही इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां प्रकृति, पुराण और लोकआस्था का अद्भुत संगम दिखाई देता है।