संकटमोचन संगीत समारोह : सरोद की साधना और ओडिसी की अभिव्यक्ति में सजी चौथी निशा, अनूप जलोटा के भजनों पर झूमे श्रोता, संगीत से रची हनुमत भक्ति की अलौकिक छटा

संकट मोचन संगीत समारोह के 103वें आयोजन की चौथी निशा भक्ति, साधना और शास्त्रीय कला के अद्भुत संगम के रूप में सामने आई। संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे इस प्रतिष्ठित आयोजन में देशभर के ख्यातिलब्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आयोजित यह छह दिवसीय समारोह हर वर्ष कला और अध्यात्म का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है।
 

वाराणसी। संकट मोचन संगीत समारोह के 103वें आयोजन की चौथी निशा भक्ति, साधना और शास्त्रीय कला के अद्भुत संगम के रूप में सामने आई। संकट मोचन हनुमान मंदिर परिसर में चल रहे इस प्रतिष्ठित आयोजन में देशभर के ख्यातिलब्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आयोजित यह छह दिवसीय समारोह हर वर्ष कला और अध्यात्म का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है।

चौथी निशा का आगाज प्रख्यात सरोद वादक पं. देव ज्योति बोस ने राग ‘महावीर कल्याण’ के माध्यम से बजरंग साधना की अनुपम प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने आलाप से शुरुआत करते हुए सरोद के तारों पर जावा फेरते हुए राग की गंभीरता और गहराई को उभारा। धीरे-धीरे जोड़ और फिर झाला की प्रभावशाली प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद राग पटदीप में दो स्वर रचनाओं का मनोहारी वादन प्रस्तुत किया गया, जिसने देर तक श्रोताओं को बांधे रखा। अंत में तेज धुन के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ, जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। तबले पर पं. कुमार बोस और रोहेन बोस की संगत ने कार्यक्रम को और ऊंचाई प्रदान की।

अनूप जलोटा की भावपूर्ण प्रस्तुति 
भजन सम्राट अनूप जलोटा की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने “केसरीनंदन से लगन लगी”, “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे”, “कौन कहता है भगवान आते नहीं” और “अच्युतम केशवम दामोदरम” जैसे भजनों के माध्यम से ऐसा आध्यात्मिक वातावरण रचा कि पूरा परिसर भक्ति रस में सराबोर हो उठा। “काशी बदली, अयोध्या बदली अब मथुरा की बारी” जैसे भजनों पर श्रोताओं की भावनाएं चरम पर पहुंच गईं।

ओडिसी नृत्य में सजीव हुई राम कथा
दूसरी प्रस्तुति में ओडिसी नृत्यांगना कृतिया नरसिंह राणा ने अपनी अभिव्यक्ति से दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। उन्होंने प्रारंभ में काशी विश्वनाथ मंदिर की स्तुति प्रस्तुत करते हुए भगवान शिव के विविध रूपों को भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया। इसके बाद उन्होंने मात्र 30 मिनट में रामचरितमानस पर आधारित संपूर्ण राम कथा को मंच पर जीवंत कर दिया।

नृत्य के माध्यम से राम के बाल्यकाल, शिव धनुष भंग, सीताहरण और जटायु मोक्ष जैसे प्रसंगों को सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं, हस्त मुद्राओं और सधे हुए पद संचालन से प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया। पृष्ठभूमि में गूंजते संगीत और गायन ने दर्शकों को रामायण के युग की स्मृतियों में पहुंचा दिया। प्रस्तुति के अंत में दर्शकों की तालियों की गूंज देर तक वातावरण में बनी रही।

समावेशी परंपरा का प्रतीक बना आयोजन
इस वर्ष के आयोजन में देश-विदेश के कई पद्म पुरस्कार विजेता और विभिन्न धर्मों के कलाकार भाग ले रहे हैं, जो इस समारोह की समावेशी और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। संकट मोचन संगीत समारोह एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि कला और भक्ति की कोई सीमा नहीं होती।

तस्वीरें ....