संकटमोचन संगीत समारोह: सुर-साधना का पांचवां दिन, भक्ति, संगीत और नृत्य का अद्भुत संगम
वाराणसी। संकटमोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा में सुरों, ताल और भक्ति के अनूठे संगम से मंदिर परिसर गूंज उठा। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से आए प्रख्यात कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। पूरे वातावरण में भक्ति रस ऐसा घुला कि श्रोता रातभर झूमते नजर आए।
पांचवीं निशा की शुरुआत पारंपरिक वंदना और हनुमान जी की आराधना से हुई। इसके बाद शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की श्रृंखला शुरू हुई, जिसने श्रोताओं को शुरुआत से ही बांध लिया। कलाकारों ने विभिन्न राग-रागिनियों और जटिल बंदिशों को बड़ी सहजता और भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया। भजनों की मधुर धुनों ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
वाद्य प्रस्तुतियों में तबला, सितार और बांसुरी की जुगलबंदी ने विशेष आकर्षण बटोरा, वहीं कथक नृत्य की भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर प्रस्तुति के बाद मंदिर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था। कलाकारों ने न केवल अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया, बल्कि भक्ति और संगीत के अद्भुत संतुलन को भी जीवंत किया।
इस समारोह की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि सभी कलाकार बिना किसी पारिश्रमिक के अपनी प्रस्तुति देते हैं। वे इसे हनुमान जी की सेवा और साधना के रूप में देखते हैं। यही समर्पण इस आयोजन को देश के सबसे प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में स्थान दिलाता है और हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु व संगीत प्रेमी यहां खिंचे चले आते हैं।
देर रात तक चले कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आए दर्शकों की भी भारी भीड़ उमड़ी रही। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सका। आयोजन समिति के अनुसार आने वाले दिनों में भी इसी तरह की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो श्रोताओं को भक्ति और संगीत की इस अनूठी यात्रा से जोड़े रखेंगी।
103वें संस्करण के रूप में आयोजित यह प्रतिष्ठित समारोह 6 से 11 अप्रैल तक चल रहा है, जिसमें स्थापित कलाकारों के साथ-साथ नई प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जा रहा है। इस आयोजन की खासियत यह है कि इसमें विभिन्न धर्मों और समुदायों के कलाकार एक साथ आकर संगीत के माध्यम से भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। यही समरसता इस समारोह को अन्य आयोजनों से अलग पहचान दिलाती है।