संकटमोचन संगीत समारोह : सुर साधना और आस्था का संगम, भोर तक गूंजते रहे राग-रागिनी, ओडिसी नृत्य, सितार वादन और शास्त्रीय गायन ने बांधा समां

संकट मोचन मंदिर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध 103वें संकट मोचन संगीत समारोह का भव्य समापन शनिवार की भोर में शास्त्रीय संगीत, नृत्य और भक्ति की अनुपम प्रस्तुतियों के साथ हुआ। छह दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित आयोजन के अंतिम दिन देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी साधना और कला से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी रात मंदिर परिसर भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।
 

वाराणसी। संकट मोचन मंदिर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध 103वें संकट मोचन संगीत समारोह का भव्य समापन शनिवार की भोर में शास्त्रीय संगीत, नृत्य और भक्ति की अनुपम प्रस्तुतियों के साथ हुआ। छह दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित आयोजन के अंतिम दिन देश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी साधना और कला से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी रात मंदिर परिसर भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

समारोह की अंतिम रात्रि का शुभारंभ भगवान हनुमान जी की विधिवत आराधना के साथ हुआ। इसके बाद मंच पर प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात से लेकर भोर तक लगातार चलता रहा। दर्शक पूरी रात भाव-विभोर होकर कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना सुजाता महापात्रा और विख्यात गुरु पंडित रतिकांत महापात्रा की मनमोहक प्रस्तुति से हुई। दोनों कलाकारों ने भगवान जगन्नाथ और हनुमान जी पर आधारित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। उनकी सधी हुई मुद्राएं, अभिव्यक्ति और तालमेल ने उपस्थित जनसमूह को देर तक तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।

इसके बाद मंच संभाला प्रसिद्ध सितार वादक मेहताब अली नियाजी ने। उन्होंने राग आधारित प्रस्तुति के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की गहराई और मधुरता का शानदार प्रदर्शन किया। तबले पर युवा कलाकार ईशान घोष की संगत ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया। सितार और तबले की जुगलबंदी ने श्रोताओं को खूब आकर्षित किया। समारोह के अंतिम चरण में प्रख्यात शास्त्रीय गायिका कलापिनी कोमकली ने अपनी सुमधुर आवाज से समां बांध दिया। भोर के समय प्रस्तुत किए गए राग, बंदिशें और भक्ति गीतों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया। उनकी प्रस्तुति के साथ ही 103वें संकट मोचन संगीत समारोह का विधिवत समापन हुआ।

अंतिम दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं, संगीत प्रेमियों और शहर के गणमान्य लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। पूरी रात अनुशासन और भक्ति का माहौल बना रहा। आयोजकों द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 6 से 11 अप्रैल तक आयोजित इस समारोह में देश-विदेश के 100 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। प्रतिदिन देर रात से लेकर सूर्योदय तक चलने वाले इस आयोजन में शास्त्रीय गायन, वादन और नृत्य की विविध विधाओं की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दी गईं। संकट मोचन संगीत समारोह को देश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में गिना जाता है, जो हर वर्ष काशी की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।