काशी में संत करेंगे GEN Z से संवाद, संस्कृति संसद में गूंजेगी युवाओं की आवाज
2 नवंबर से तीन दिवसीय आयोजन, सनातन संस्कृति और भविष्य को लेकर युवा पीढ़ी के विचारों को समझेंगे संत-महंत
देशभर से जुटेंगे संत, धर्माचार्य और विद्वान, सीएम योगी समेत दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भेजा गया निमंत्रण
अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, विहिप और काशी विद्वत् परिषद के तत्वावधान में होगा आयोजन
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में आगामी दो नवंबर से तीन दिवसीय संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। इस बार आयोजन में पहली बार जेनरेशन जेड (GEN Z) यानी युवा पीढ़ी को विशेष मंच प्रदान किया जाएगा। देशभर से आने वाले युवाओं के साथ संत, धर्माचार्य और विद्वान संवाद करेंगे। इस दौरान सनातन संस्कृति को लेकर युवाओं की सोच, उनके सवालों और भविष्य को लेकर उनकी अपेक्षाओं को समझने का प्रयास किया जाएगा।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के अनुसार, संस्कृति संसद में युवा पीढ़ी की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाएगा। संत और विद्वान सीधे युवाओं से संवाद कर यह जानेंगे कि सनातन धर्म, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर उनके मन में क्या विचार हैं। साथ ही बदलते सामाजिक परिवेश में युवा भारतीय संस्कृति और अपनी धार्मिक विरासत को किस रूप में देखते हैं, इस पर भी चर्चा होगी।
युवा पीढ़ी के सवालों पर होगा मंथन
संस्कृति संसद का उद्देश्य संतों और युवाओं के बीच संवाद की ऐसी कड़ी स्थापित करना है, जिसमें नई पीढ़ी अपने विचार, जिज्ञासाएं और दृष्टिकोण खुलकर रख सके। संत और विद्वान युवाओं के सवालों पर चर्चा करते हुए उन्हें सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास करेंगे। भविष्य की चुनौतियों और उनमें युवाओं की भूमिका पर भी विमर्श होने की संभावना है।
देशभर से जुटेंगे संत और विद्वान
तीन दिवसीय कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से संतों और धर्माचार्यों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, विश्व हिंदू परिषद और काशी विद्वत् परिषद के तत्वावधान में कराया जाएगा। कार्यक्रम में सहभागिता के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी निमंत्रण भेजा गया है।
सनातन और नई पीढ़ी के बीच संवाद पर जोर
आयोजन के माध्यम से संत समाज नई पीढ़ी की सोच को करीब से समझने और उसके सवालों पर सार्थक चर्चा करने की दिशा में पहल करेगा। काशी में होने वाली यह संस्कृति संसद परंपरा और आधुनिक विचारों के बीच संवाद का मंच बनेगी, जहां युवाओं की दृष्टि से सनातन संस्कृति के वर्तमान और भविष्य पर विमर्श किया जाएगा।