काशी के संतों ने पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन को बताया सनातन का अपमान, कहा- अपराधी प्रवृत्ति के लोग गिरा रहे संसद की मर्यादा

वाराणसी। काशी के प्रमुख संतों ने सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद भवन परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर किये गये प्रदर्शन को सनातन धर्म और भगवा वस्त्र का सीधा अपमान बताया है। संतों ने इसे राम मंदिर और साधु-संत समाज के खिलाफ राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और पप्पू यादव के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोल दिया है। अयोध्या सहित देश के कई संतों के बाद अब काशी के संत भी इस मामले में आगबबूला हो गये हैं और तत्काल कानूनी कार्रवाई तथा संसद सदस्यता रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
 

वाराणसी। काशी के प्रमुख संतों ने सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद भवन परिसर में भगवा वस्त्र पहनकर किये गये प्रदर्शन को सनातन धर्म और भगवा वस्त्र का सीधा अपमान बताया है। संतों ने इसे राम मंदिर और साधु-संत समाज के खिलाफ राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और पप्पू यादव के खिलाफ एक साथ मोर्चा खोल दिया है। अयोध्या सहित देश के कई संतों के बाद अब काशी के संत भी इस मामले में आगबबूला हो गये हैं और तत्काल कानूनी कार्रवाई तथा संसद सदस्यता रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती का कड़ा हमला
काशी सुमेरू पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने पप्पू यादव और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को रामद्रोही बताया। उन्होंने कहा कि ये लोग आज तक राम मंदिर नहीं गये। संसद की कार्यवाही में बाधा डालना अलोकतंत्रिक, असंसदीय और अमर्यादित है। जिनका जीवन माफिया और गुंडागर्दी से भरा रहा, वे भगवा वस्त्र पहनकर संसद में धरना दे रहे हैं।

स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती, शंकराचार्य, काशी सुमेरू पीठ

स्वामी नरेन्द्रानंद ने कालनेमी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कालनेमी ने कपट रूप धारण कर हनुमान जी को भ्रमित करने की कोशिश की थी, वैसे ही पप्पू यादव सांसद के रूप में धरना दे रहे हैं। भगवा आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, राजनीति या चोर-उचक्कों का नहीं। उन्होंने मांग की कि ऐसे लोगों को तत्काल संसद से बाहर किया जाए। देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये राम मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं, जबकि इनका राम मंदिर से कोई लेना-देना नहीं और इनमें कोई आस्था भी नहीं है।

शंकराचार्य ने आगे कहा कि अयोध्या में जो हुआ वह गलत था। कोई पुजारी इसमें चोरी नहीं किया है। एसआईटी जांच चल रही है और चोरी करने वालों को जेल हुई है। भगवा को कलंकित करने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव को थर्ड डिग्री का प्रयोग करते हुए वहां से भगाना चाहिए। भगवान मान-सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।

पातालपुरी मठ के महंत ने भी जताया आक्रोश
पातालपुरी मठ काशी के महंत बाबा बालक दास ने पप्पू यादव के प्रदर्शन को ड्रामा और नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी के मामले को लेकर ऐसे लोग संसद भवन परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं जिनकी आपराधिक छवि रही है। इससे सनातन और संत समाज का अपमान हुआ है। पूरा सनातन समाज उग्र और आक्रोशित है।

बाबा बालक दास, महंत, पातालपुरी मठ, काशी

निश्चित रूप से संतों के आक्रोश को उन्हें भोगना पड़ेगा। बाबा बालक दास ने सरकार से निवेदन किया कि ऐसे माफिया प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। अगर इन पर कार्रवाई नहीं होगी तो इनका मनोबल बढ़ता रहेगा। जो भी संभव हो, तत्काल कानूनी ढंग से कार्रवाई होनी चाहिए।

संत समिति ने दी चेतावनी
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने वाराणसी की धरा से कड़े शब्दों में कहा कि संसद संविधान के अनुसार एक पवित्र परिसर है। इसका उपयोग सनातन धर्म को अपमानित करने और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को कुचलने के लिए किया गया। आज संसद परिसर का दुरुपयोग जिस प्रकार कांग्रेस, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सजायाफ्ता अपराधी पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्रों में सनातन के अपमान के लिए किया गया, वह अक्षम्य है।

स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती, राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय संत समिति

स्वामी जितेंद्रानंद ने स्पष्ट किया कि जहाँ तक राम मंदिर का प्रश्न है, अयोध्या के साधु-संतों ने जवाब दे दिया है। यदि किसी ने चोरी या गड़बड़ी की है तो एसआईटी और सुप्रीम कोर्ट मिलकर उसकी सजा तय करेंगे। लेकिन इसकी आड़ में सनातन हिंदू धर्म और साधु-संतों के त्याग-तपस्या को लांछित करने का प्रयास संत समिति कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। राजनीतिक दल के नाम पर भाजपा से लड़ना है तो लड़िए, परंतु भगवान राम और सनातन को गाली देकर, साधु-संतों का अपमान करके, छद्म वेश में पार्लियामेंट के अंदर भगवा पहनना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने महामहिम राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष दोनों से मांग की कि सांसद पप्पू यादव की संसद सदस्यता तुरंत बर्खास्त होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि वे बिना शर्त पूरे देश के हिंदुओं से सर झुकाकर माफी मांगें।

काशी के इन तीनों प्रमुख संतों के वक्तव्यों से साफ है कि पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन ने संत समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। संत समाज अब इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार और संसद से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।