सनातन धर्म और वैदिक परंपरा के संरक्षण में विद्वत परिषदों की भूमिका अहम : स्वामी अनिकेत शास्त्री

श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद के तत्वावधान में बुधवार को सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योगसाधना भवन में हरिवंश पुराण कार्यशाला, महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति और भव्य अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सनातन धर्म, वैदिक परंपरा, शास्त्रीय ज्ञान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन पर मंथन हुआ। समारोह में महाराष्ट्र से पहुंचे श्रीमहंत वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री का अभिनंदन किया गया।
 

श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद के अभिनंदन समारोह में संत-विद्वानों ने रखे विचार, हरिवंश पुराण कार्यशाला और महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति भी हुई

सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शताधिक विद्वान, आचार्य और गणमान्यजन हुए शामिल

वाराणसी। श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद के तत्वावधान में बुधवार को सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योगसाधना भवन में हरिवंश पुराण कार्यशाला, महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति और भव्य अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सनातन धर्म, वैदिक परंपरा, शास्त्रीय ज्ञान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन पर मंथन हुआ। समारोह में महाराष्ट्र से पहुंचे श्रीमहंत वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री का अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री ने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद संस्कृत शिक्षा की प्राचीन संस्था सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में उनका अभिनंदन गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि विभिन्न संत परंपराओं का सम्मान है। परिषद के अभिनंदन से सनातन धर्म, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के लिए और अधिक ऊर्जा मिली है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के संचालन में शास्त्रीय और धर्मसम्मत परंपराओं का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। ऐसे आयोजनों की व्यवस्था के लिए विद्वानों और धर्माचार्यों को सरकारों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने चाहिए। स्वामी शास्त्री ने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्कृत संस्था के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की कार्यदक्षता की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के शीघ्र उत्कर्ष की उम्मीद जताई।

परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष पं. कमलाकांत त्रिपाठी ने स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री के अभिनंदन पत्र का वाचन किया और उनके आध्यात्मिक जीवन, विद्वत्ता तथा सनातन परंपरा के क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला। सम्मानित अतिथि कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि परिषद की ओर से मिला सम्मान विश्वविद्यालय के विकास और संवर्धन के लिए प्रेरणा का काम करेगा। उन्होंने परिषद की ओर से विश्वविद्यालय के उत्कर्ष के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उनके अभिनंदन पत्र का वाचन प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने किया।

परिषद के अध्यक्ष पं. छोटेलाल त्रिपाठी ने कहा कि श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद सनातन धर्म, वैदिक परंपरा, शास्त्रीय ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि परिषद भविष्य में अपने कार्यों का विस्तार करते हुए व्यापक स्तर पर धर्म-संस्कृति संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ेगी। मुख्य न्यासी डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने परिषद की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य काशी की अन्य विद्वत एवं धर्म परिषदों के साथ समन्वय करते हुए पूरक भूमिका निभाना है। परिषद का ध्येय ‘गुरुकुल से गांव तक, शास्त्र से समाधान तक’ की संकल्पना को आगे बढ़ाना है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर जैसे सीमांत क्षेत्रों में मंदिरों में अर्चक प्रशिक्षण और नित्य पूजा की पुनर्स्थापना सहित विभिन्न कार्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा सहित अनेक विद्वान और धर्माचार्य मौजूद रहे। काशी के कई मूर्धन्य विद्वानों का पूजन, अभिनंदन और सम्मान भी किया गया। संचालन परिषद के प्रवक्ता पं. विजय शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन संगठन मंत्री पं. संजय त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रामप्रिय पांडेय, डॉ. उमंग नाथ शर्मा, प्रो. महेंद्रनाथ पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग सहित शताधिक विद्वान, आचार्य और गणमान्यजन उपस्थित रहे।