रॉकेट लर्निंग” से प्रारंभिक बाल्यावस्था के बच्चे के मानसिक, भाषाई, सामाजिक और भावनात्मक विकास की नींव हो रही मजबूत 

प्रारंभिक बाल्यावस्था को किसी भी बच्चे के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवस्था माना जाता है। यही वह समय होता है जब बच्चे के मानसिक, भाषाई, सामाजिक और भावनात्मक विकास की मजबूत नींव तैयार होती है। योगी सरकार इस उद्देश्य के साथ वाराणसी के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए 'स्कूल पूर्व शिक्षा' को अधिक प्रभावी और रोचक बना रही है। इसके लिए साल भर का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है।  वाराणसी की लगभग 3700 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे इस अभियान से जुड़े हुए हैं। लगभग 15 हजार अभिभावकों को बच्चों की सीखने के लिए जोड़ा गया है। प्रत्येक माह “पैरेंट आंगनवाड़ी मीटिंग”आयोजित की जाती है, जिसमें बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है। प्रशासन के इस प्रयास से बच्चों की उपस्थिति और ठहराव में वृद्धि हुई है।
 

- योगी सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए 'स्कूल पूर्व शिक्षा' को बना रही प्रभावी और रोचक 

- बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने “पहल” पुस्तक के माध्यम से वर्षभर के लिए 10 विषयों का पाठ्यक्रम किया तैयार 

- 3700 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां,1 लाख 20 हजार बच्चे ,15 हजार अभिभावक इस अभियान से जुड़े 

- “रॉकेट लर्निंग” संस्था द्वारा प्रतिदिन की गतिविधियों के वीडियो को व्हाट्सएप से आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ,छात्रों और अभिभावकों को भेजा जाता है 

- “पैरेंट आंगनवाड़ी मीटिंग”  में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर होती है  चर्चा 

- प्रशासन के इस प्रयासों से बच्चों की उपस्थिति और ठहराव में हुई वृद्धि,अभिभावकों का भरोसा बढ़ा  

- आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का होता है “सैटरडे टेस्ट” 

- आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और स्वयंसेवी संस्था “रॉकेट लर्निंग” के संयुक्त प्रयासों से नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही

वाराणसी। प्रारंभिक बाल्यावस्था को किसी भी बच्चे के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवस्था माना जाता है। यही वह समय होता है जब बच्चे के मानसिक, भाषाई, सामाजिक और भावनात्मक विकास की मजबूत नींव तैयार होती है। योगी सरकार इस उद्देश्य के साथ वाराणसी के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए 'स्कूल पूर्व शिक्षा' को अधिक प्रभावी और रोचक बना रही है। इसके लिए साल भर का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है।  वाराणसी की लगभग 3700 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे इस अभियान से जुड़े हुए हैं। लगभग 15 हजार अभिभावकों को बच्चों की सीखने के लिए जोड़ा गया है। प्रत्येक माह “पैरेंट आंगनवाड़ी मीटिंग”आयोजित की जाती है, जिसमें बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है। प्रशासन के इस प्रयास से बच्चों की उपस्थिति और ठहराव में वृद्धि हुई है।

सशक्त हो रही आंगनवाड़ी शिक्षा व्यवस्था

 जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल तेजी से आकार ले रही है।  आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को केवल पोषण ही नहीं बल्कि खेल-आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से स्कूल के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों में स्कूल के प्रति रुचि विकसित करना और भविष्य में ड्रॉपआउट की समस्या को कम करना है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में बच्चों की बुनियादी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन,आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और स्वयंसेवी संस्था “रॉकेट लर्निंग” के संयुक्त प्रयासों से नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है।

 

जिलाधिकारी ने बताया कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा विकसित “पहल” पुस्तक के माध्यम से पूरे वर्ष के लिए 10 विषयों पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

-जुलाई -हमारी दिनचर्या 
-अगस्त -  हमारा शरीर
 -सितंबर - हमारा परिवार
 -अक्टूबर - पशु पक्षी 
-नवंबर -यातायात के साधन 
-दिसंबर - पुनरावृत्ती 
-जनवरी - हमारा परिवेश 
-फरवरी - सब्जियां  
-मार्च  - हमारे मददगार
-अप्रैल -धरती और आकाश 
-मई -हमारा देश  
-जून - पुनरावृत्ती 

मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि स्वयंसेवी संस्था  द्वारा प्रतिदिन की गतिविधियों के वीडियो को व्हाट्सएप के माध्यम से लगभग 3700 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां और करीब 1 लाख 20 हजार बच्चे को भेजा जाता है। स्वयं सेवी संस्था द्वारा तकनीक आधारित सपोर्ट मॉडल के माध्यम से कार्यकत्रियों को प्रशिक्षण  दिया जा रहा है ताकि वे बच्चों के लिए रोचक और खेल-आधारित शिक्षण गतिविधियां संचालित कर सकें। 

घर और आंगनवाड़ी ,दोनों स्तरों पर सीखने का वातावरण 

सीडीओ ने जानकारी दिया कि आंगनबाड़ी केंद्र के साथ ही घर पर भी सीखने का वातावरण विकसित किया जा रहा है। लगभग 15 हजार अभिभावकों को बच्चों की सीखने की प्रक्रिया से सक्रिय रूप से जोड़ा गया है। अभिभावकों के व्हाट्सएप समूहों में छोटे वीडियो और सरल गतिविधियां साझा की जाती हैं, ताकि माता-पिता घर पर भी बच्चों के साथ सीखने की प्रक्रिया में भागीदारी कर सकें।

क्षमता विकास एवं प्रेरणा आधारित मॉडल

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों  का प्रत्येक शनिवार को आयोजित “सैटरडे टेस्ट” के माध्यम से उनकी समझ और सहभागिता का आकलन किया जाता है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली कार्यकत्रियों को गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाता है। 

“पैरेंट आंगनवाड़ी मीटिंग” 

प्रत्येक माह “पैरेंट आंगनवाड़ी मीटिंग” (PAM) आयोजित की जाती है, जिसमें बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा होती है। इस नवाचार का असर अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिखाई देने लगा है। बच्चों की उपस्थिति और ठहराव में वृद्धि हुई है तथा अभिभावकों का विश्वास भी आंगनबाड़ी के प्रति बढ़ रहा है। संस्था बच्चों की सीखने की दक्षता का प्रत्येक छह माह में मूल्यांकन कर रिपोर्ट तैयार करेगी ,जिससे इस मॉडल की प्रभावशीलता का निरंतर आकलन किया जा सके।