43,435 दीपों की रोशनी से जगमगाया धर्मसंघ, करपात्र दीपावली का हुआ भव्य आयोजन
वाराणसी। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के 119वें प्राकट्योत्सव के तहत गुरुवार को दुर्गाकुंड स्थित श्रीधर्मसंघ शिक्षा मंडल का परिसर हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। सप्ताहव्यापी करपात्र प्राकट्योत्सव के तीसरे दिन पूर्व संध्या पर ‘करपात्र दीपावली’ का आयोजन किया गया। इस दौरान एक साथ 43,435 दीप प्रज्ज्वलित किए गए। दीपों की रोशनी से पूरा धर्मसंघ परिसर भव्य और आध्यात्मिक आभा से भर उठा।
सायंकाल गोधूलि बेला में मणि मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया। धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज और पं. जगजीतन पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन के बीच मणि मंदिर के मुख्य सभागार में प्रथम दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके बाद वैदिक आचार्यों और बटुकों ने एक साथ पूरे परिसर में दीप जलाए।
मंदिर के बाहर स्थित बाग में पांच हजार दीपों की दीपमाला भी सजाई गई। मुख्य द्वार, करपात्र प्रतिमा, करपात्र सभागार, महाराज निवास, अन्नपूर्णा भोजन भंडार, गौशाला, बाग, अतिथि गृह और कार्यालय समेत पूरे परिसर में दीप प्रज्ज्वलित किए गए। विद्युत झालरों और दीप मालाओं से की गई सजावट ने आयोजन की भव्यता बढ़ा दी।
दीपों और पुष्पों से सनातन धर्म के प्रतीक चिह्न स्वास्तिक, ओमकार, त्रिशूल और कमल पुष्प बनाए गए। फूलों की रंगोली भी आकर्षण का केंद्र रही। मुख्य द्वार पर ‘सुस्वागतम्’ की रंगोली, मणि मंदिर के स्तंभों पर कमल पुष्प और सभागार के मध्य विशाल कलश की रंगोली सजाई गई।
धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज का व्यक्तित्व और कृतित्व सनातन धर्म के दैदीप्यमान सूर्य के समान है। उनके दिखाए मार्ग से समाज को सदैव प्रकाश मिलता रहेगा। इसी श्रद्धा के चलते प्रत्येक वर्ष प्राकट्योत्सव की पूर्व संध्या पर करपात्र दीपावली मनाने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि स्वामी करपात्री जी के धरती पर अवतरण के वर्षों की संख्या के अनुरूप दीपदान कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और बटुक शामिल हुए। शुक्रवार को प्राकट्योत्सव के चौथे दिन मुख्य समारोह ‘करपात्र रत्न सम्मान समारोह’ आयोजित होगा। यह कार्यक्रम धर्मसंघ स्थित करपात्र सभागार में शाम चार बजे से शुरू होगा।