बरेका में दशहरा पर होगा रावण दहन, खड़े किए गए विशालकाय पुतले, रामायण के प्रसंगों का होगा मंचन

बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयदशमी पर्व को लेकर बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के मैदान में रावण दहन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतलों को खड़ा कर दिया गया है। पुतलों के तैयार होने के साथ ही आयोजन स्थल पर उत्सवी माहौल बनने लगा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। दर्शकों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मैदान में बैरिकेडिंग की गई है।
 

वाराणसी। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयदशमी पर्व को लेकर बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के मैदान में रावण दहन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मैदान में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के विशाल पुतलों को खड़ा कर दिया गया है। पुतलों के तैयार होने के साथ ही आयोजन स्थल पर उत्सवी माहौल बनने लगा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। दर्शकों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मैदान में बैरिकेडिंग की गई है।

चार घंटे के नाट्य मंचन में दिखे रामायण के प्रसंग
रावण दहन से पहले बरेका मैदान में रामायण पर आधारित लगभग चार घंटे के नाट्य रूपांतरण का मंचन किया गया। इसमें भगवान श्रीराम के जीवन, सीता हरण, रावण के अत्याचार और लंका विजय से जुड़े प्रसंग प्रस्तुत किए गए। मंचन के माध्यम से दर्शकों को सत्य, धर्म और मर्यादा का संदेश दिया गया। विजयदशमी पर रावण दहन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहता है।

तीन पीढ़ियों से पुतले बनाने की परंपरा
बरेका में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले बनाने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। इस काम को मुस्लिम कारीगर परिवार तीन पीढ़ियों से आगे बढ़ा रहा है। शमशाद खान अपने सहयोगियों के साथ पुतले तैयार करते हैं। परिवार की यह कला काशी की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सद्भाव की मिसाल भी है।

बांस, कागज और कपड़ों से तैयार होते हैं पुतले
विशाल पुतलों को तैयार करने के लिए कारीगरों को कई सप्ताह तक मेहनत करनी पड़ती है। सबसे पहले बांस से ढांचा बनाया जाता है। इसके बाद कागज, रस्सी और कपड़ों की मदद से पुतलों को आकार दिया जाता है। रंगों और सजावटी सामग्री से इन्हें आकर्षक रूप दिया जाता है। रावण के दस सिर पुतले का विशेष आकर्षण होते हैं। वर्ष 2024 में बरेका के आयोजन में रावण का पुतला 75 फीट, कुंभकरण का 65 फीट और मेघनाद का 55 फीट ऊंचा बनाया गया था। हालांकि, इस वर्ष पुतलों की ऊंचाई की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग
रावण दहन के दौरान दर्शकों को पुतलों से सुरक्षित दूरी पर रखने के लिए व्यवस्था की गई है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ काशी की सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। भगवान श्रीराम के हाथों रावण के अंत का दृश्य लोगों को अहंकार त्यागने और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।