रथयात्रा मेले का भव्य समापन : आस्था, भक्ति और उल्लास से सराबोर रही काशी, लाखों श्रद्धालुओं ने किए भगवान जगन्नाथ के दर्शन
वाराणसी। काशी के ऐतिहासिक लक्खा मेलों में शामिल तीन दिवसीय श्री जगन्नाथ रथयात्रा मेले का शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के बीच भव्य समापन हो गया। मेले के अंतिम दिन सुबह से ही भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर से लेकर रथयात्रा मार्ग तक भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दिनभर "जय जगन्नाथ" के गगनभेदी जयघोष, शंखनाद, घंटा-घड़ियाल और भजन-कीर्तन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
अंतिम दिन दर्शन के लिए वाराणसी ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्त हाथों में नानखटाई, तुलसी की मालाएं, नारियल और अन्य पूजन सामग्री लेकर भगवान के दर्शन के लिए घंटों कतारों में खड़े रहे। जैसे ही मंदिर के पट खुले, श्रद्धालुओं ने भगवान श्री जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और विश्व कल्याण की प्रार्थना की। मान्यता के अनुसार भगवान को नानखटाई का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है, इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यह परंपरा निभाई।
मेले के अंतिम दिन धार्मिक आस्था के साथ-साथ बाजारों में भी जबरदस्त रौनक देखने को मिली। रथयात्रा मार्ग पर सजी अस्थायी दुकानों पर नानखटाई, तुलसी की मालाएं, खिलौने, श्रृंगार सामग्री, मिठाइयां, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक सामान की जमकर खरीदारी हुई। बच्चों और महिलाओं में मेले को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। देर रात तक बाजारों में खरीदारों की भीड़ बनी रही, जिससे व्यापारियों के चेहरे भी खिले नजर आए।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। रथयात्रा मार्ग, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सैकड़ों पुलिसकर्मियों, पीएसी और ट्रैफिक पुलिस के जवानों की तैनाती के साथ प्रमुख चौराहों एवं संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की गई। वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्था का जायजा लेते रहे। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
तीन दिनों तक चले इस ऐतिहासिक रथयात्रा मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर काशी की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखा। श्रद्धा, भक्ति, लोक संस्कृति और सामाजिक समरसता का प्रतीक यह मेला शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। मेले के सफल समापन के साथ काशी की एक और ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा का गरिमामय निर्वहन हुआ, जिसने श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का नया संचार किया।
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