रामनगर किला संपत्ति विवाद में विष्णु प्रिया की अर्जी खारिज, 21 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

रामनगर किला, बनारस स्टेट की गद्दी, नदेसर पैलेस समेत काशी राजपरिवार से जुड़ी अन्य संपत्तियों के स्वामित्व और उत्तराधिकार को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को सिविल जज द्वितीय (वरिष्ठ खंड) नेहा सिंह की अदालत ने विष्णु प्रिया की अर्जी खारिज कर दी। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दलीलों और दस्तावेजों पर सुनवाई के बाद अदालत ने मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग वाली अर्जी को निरस्त कर दिया। अब मूल वाद की सुनवाई आगे जारी रहेगी। मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की गई है।
 

बनारस स्टेट की गद्दी, नदेसर पैलेस और अन्य संपत्तियों पर अधिकार को लेकर चल रहा है कानूनी विवाद

वाराणसी। रामनगर किला, बनारस स्टेट की गद्दी, नदेसर पैलेस समेत काशी राजपरिवार से जुड़ी अन्य संपत्तियों के स्वामित्व और उत्तराधिकार को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार को सिविल जज द्वितीय (वरिष्ठ खंड) नेहा सिंह की अदालत ने विष्णु प्रिया की अर्जी खारिज कर दी। दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दलीलों और दस्तावेजों पर सुनवाई के बाद अदालत ने मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग वाली अर्जी को निरस्त कर दिया। अब मूल वाद की सुनवाई आगे जारी रहेगी। मामले में अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की गई है।

यह विवाद पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह के पुत्र अनंत नारायण सिंह की ओर से वर्ष 2011 में दाखिल किए गए मूल वाद से जुड़ा है। वाद में अनंत नारायण सिंह ने स्वयं को दिवंगत महाराज का ज्येष्ठ पुत्र बताते हुए बनारस स्टेट, रामनगर किला समेत अन्य संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा किया है। उन्होंने विष्णु प्रिया समेत अन्य संबंधित पक्षों को रामनगर किला से बेदखल करने के साथ स्थायी निषेधाज्ञा और क्षतिपूर्ति की मांग भी की है।

2025 में दाखिल की थी अर्जी
मामले में विष्णु प्रिया की ओर से वर्ष 2025 में अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी। इसमें मूल मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने का अनुरोध किया गया था। अर्जी के समर्थन में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों के साथ विभिन्न न्यायिक नजीरों का हवाला दिया गया था। विष्णु प्रिया की ओर से दलील दी गई कि वह भी पूर्व काशी नरेश विभूति नारायण सिंह की पुत्री हैं। इसलिए संबंधित संपत्तियों में उनका भी समान उत्तराधिकार अधिकार बनता है। उनका पक्ष था कि उत्तराधिकार से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

विलय समझौते का दिया हवाला
वहीं, अनंत नारायण सिंह की ओर से विष्णु प्रिया की अर्जी का विरोध किया गया। उनकी ओर से 9 सितंबर 1949 को भारत सरकार के साथ हुए विलय समझौते का हवाला देते हुए संपत्तियों के अधिकार और मूल वाद की पोषणीयता से संबंधित दलीलें अदालत के समक्ष रखी गईं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और संबंधित दस्तावेजों व कानूनी प्रावधानों पर विचार के बाद अदालत ने विष्णु प्रिया की मुकदमा प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग वाली अर्जी को निरस्त कर दिया।

अब मूल वाद की सुनवाई होगी
अर्जी खारिज होने के बाद संपत्तियों के अंतिम स्वामित्व और उत्तराधिकार का विवाद समाप्त नहीं हुआ है। मूल वाद में इन मुद्दों पर सुनवाई आगे जारी रहेगी। रामनगर किला और बनारस स्टेट की ऐतिहासिक संपत्तियों से जुड़े होने के कारण इस मुकदमे पर काशी में विशेष नजर बनी हुई है। अब 21 सितंबर की सुनवाई में मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।