संकटमोचन हनुमान मंदिर में रामायण सम्मेलन संपन्न, हनुमत भक्ति का दिया गया संदेश

प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर में हनुमत जयंती के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय सार्वभौम रामायण सम्मेलन का रविवार को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए विद्वान कथा व्यासों ने भगवान हनुमान के चरित्र, उनकी भक्ति और समर्पण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
 

वाराणसी। प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर में हनुमत जयंती के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय सार्वभौम रामायण सम्मेलन का रविवार को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए विद्वान कथा व्यासों ने भगवान हनुमान के चरित्र, उनकी भक्ति और समर्पण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।

सम्मेलन के तीसरे दिन प्रख्यात कथा मर्मज्ञ डॉ. भारत भूषण पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान हनुमान का अवतार केवल रामकाज के लिए हुआ था। उन्होंने कहा कि जिनका इस संसार में कोई नहीं होता, उनके लिए स्वयं परमात्मा सहारा बनते हैं, इसी कारण भगवान को ‘दीनबंधु’ कहा गया है। उन्होंने रामचरितमानस के सुंदरकांड का उल्लेख करते हुए बताया कि हनुमान जी की भक्ति, निष्ठा और समर्पण हर व्यक्ति के जीवन के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जिन्हें अपनाकर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।

वहीं पं. चंद्रकांत चतुर्वेदी ने कहा कि श्रीरामचरितमानस में भरत और हनुमान जैसे भक्तवत्सल चरित्र दुर्लभ हैं। उन्होंने त्रेता युग में हनुमान जी की प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति की तुलना द्वापर युग में गोपियों की भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति से करते हुए कहा कि सच्चा प्रेम और समर्पण ही भक्ति का मूल है। उन्होंने यह भी कहा कि जो श्रद्धालु संकट मोचन के दर्शन करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

सम्मेलन में अन्य विद्वानों जैसे डॉ. नलिनी श्याम कामिल, डॉ. एनके दुबे, डॉ. ऋतुराज कात्यायन, धर्मप्रकाश मिश्र, रामेश्वर त्रिपाठी और पारस नाथ पाण्डेय ने भी हनुमत चरित्र पर अपने विचार प्रस्तुत किए और भक्तों को आध्यात्मिक संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिनमें एडवोकेट यशपाल कुमार, विजय बहादुर सिंह, विश्वनाथ यादव, राघवेंद्र पाण्डेय, संदीप पाण्डेय और अमृत प्रभात सहित कई प्रमुख लोग शामिल थे।