JPNIC को निजी हाथों में देने के फैसले का विरोध, सपाइयों ने कलेक्ट्रेट पर किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा 

लखनऊ के गोमतीनगर स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी क्षेत्र को 30 वर्ष की दीर्घकालीन लीज पर दिए जाने के निर्णय के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली भेजा गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और JPNIC को सार्वजनिक संस्थान के रूप में विकसित करने की मांग की।
 

वाराणसी। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को निजी क्षेत्र को 30 वर्ष की दीर्घकालीन लीज पर दिए जाने के निर्णय के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली भेजा गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और JPNIC को सार्वजनिक संस्थान के रूप में विकसित करने की मांग की।

ज्ञापन में कहा गया कि JPNIC केवल एक भवन या निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि लोकतंत्र, सामाजिक परिवर्तन, लोकसेवा और लोकनायक जय प्रकाश नारायण की विचारधारा एवं विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी संकल्पना और निर्माण प्रक्रिया वर्ष 2013 में शुरू हुई थी। परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत करीब 265.58 करोड़ रुपये थी, जो विभिन्न संशोधनों के बाद बढ़कर लगभग 864.99 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह परियोजना तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल की प्रमुख महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल थी। इसे लखनऊ की पहचान के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई थी। आरोप लगाया गया कि वर्ष 2017 के बाद लंबे समय तक केंद्र बंद और उपेक्षित रहने के कारण भवन, उपकरणों और अन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा।

ज्ञापन में कहा गया कि 25 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद ने JPNIC को निजी कंसोर्टियम को 30 वर्ष की लीज पर दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चयनित कंसोर्टियम की उच्चतम बोली करीब 831 करोड़ रुपये रही है। शेष कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी भी निजी संस्था को दिए जाने की बात कही गई है। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जनता के करोड़ों रुपये से निर्मित और लोकनायक जय प्रकाश नारायण की विरासत से जुड़े केंद्र को निजी क्षेत्र को दीर्घकालीन लीज पर देने से पहले व्यापक सार्वजनिक विमर्श और पारदर्शी समीक्षा क्यों नहीं की गई।

ज्ञापन में JPNIC को जनहित में सार्वजनिक संस्थान के रूप में विकसित करने, इसे सांस्कृतिक, शैक्षणिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक गतिविधियों का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की मांग की गई। साथ ही लोकनायक जय प्रकाश नारायण के जीवन, संघर्ष, लोकतांत्रिक मूल्यों और संपूर्ण क्रांति आंदोलन के इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए संग्रहालय, स्मारक और शोध केंद्र विकसित करने का सुझाव दिया गया।

प्रदर्शनकारियों ने परियोजना की प्रारंभिक से संशोधित लागत तक हुए खर्च, निर्माण में देरी, रखरखाव और भवन को हुई क्षति की स्वतंत्र वित्तीय एवं तकनीकी जांच कराने तथा रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी रखी। यदि सरकार निजी लीज के फैसले पर कायम रहती है तो निविदा प्रक्रिया, चयनित संस्था, लीज की शर्तें, राजस्व व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान सार्वजनिक करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि JPNIC को महज व्यावसायिक संपत्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह सार्वजनिक धन, ऐतिहासिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा विषय है। राष्ट्रपति से पूरे मामले का संज्ञान लेकर पारदर्शी समीक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की गई।