रविवार से शुरू होगा पितृपक्ष, पूर्णिमा श्राद्ध और पितरों के तर्पण के लिए पिशाचमोचन में जुटी भीड़ 

पितरों की प्रसन्नता और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्धकर्म का पखवाड़ा 27 सितंबर से शुरू होगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि के साथ ही 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जा रही है। पक्ष के अंत में अमावस्या पड़ने के कारण पूर्णिमा को दिवंगत हुए लोगों का श्राद्ध प्रतिपदा से पहले करने का विधान है। ऐसे में काशी में पूर्णिमा श्राद्ध के साथ ही पिंडदानियों का जुटना शुरू हो गया है।
 

गया जाने से पहले काशी में शिवगया श्राद्ध की तैयारी, तीन घंटे में पूरा हो रहा कर्मकांड

पिशाचमोचन तीर्थ पर बढ़ने लगी भीड़, मुख्य प्रांगण में टेंट और बैरिकेडिंग की व्यवस्था

बाढ़ की मिट्टी हटाकर कई घाटों पर पंडों ने कराई सफाई, पितृपक्ष में पितरों के तर्पण को पहुंचेगे लोग 

वाराणसी। पितरों की प्रसन्नता और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्धकर्म का पखवाड़ा 27 सितंबर से शुरू होगा। हालांकि पूर्णिमा तिथि के साथ ही 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत मानी जा रही है। पक्ष के अंत में अमावस्या पड़ने के कारण पूर्णिमा को दिवंगत हुए लोगों का श्राद्ध प्रतिपदा से पहले करने का विधान है। ऐसे में काशी में पूर्णिमा श्राद्ध के साथ ही पिंडदानियों का जुटना शुरू हो गया है।

पिशाचमोचन तीर्थ पर श्राद्धकर्म के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला शुरू हो गया है। जिन लोगों को गया में पितरों को बैठाने जाना है, वे उससे पहले काशी के शिवगया में श्राद्ध की विधियां पूरी कर रहे हैं। वहीं अधिकांश लोग पूर्णिमा तिथि पर श्राद्ध करने के बाद रात में ही गया के लिए रवाना होंगे।

पिशाचमोचन तीर्थ के मुख्य प्रांगण में बारिश और धूप से बचाव के लिए टेंट लगाया गया है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग भी की गई है। कर्मकांड कराने वाले तीर्थ पुरोहितों ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। शहर से बाहर रहने वाले यजमानों ने पुरोहितों से संपर्क कर लिया है। बाढ़ के बाद घाटों पर जमी मिट्टी से कर्मकांड में परेशानी न हो, इसके लिए कई घाटों पर पंडों ने अपने स्तर से सफाई भी कराई है।

तीन घंटे में पूरा हो रहा श्राद्धकर्म
पिशाचमोचन तीर्थ पर श्राद्ध की प्रक्रिया करीब तीन घंटे में पूरी हो रही है। पिंडदानी पवित्र जल हाथ में लेकर संकल्प करते हैं और अपने पितरों का नाम लेते हैं। इसके बाद जल अर्पित कर आगे की विधियां पूरी की जाती हैं। शुद्ध जल से तर्पण करते हुए प्रेतात्माओं की मुक्ति और पितरों की शांति के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की जाती है। कर्मकांड के अंत में पीपल के पेड़ में जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद पिंडदानी भगवत कथा भी सुनते हैं।

चार प्रकार के श्राद्ध की विधियां
पिशाचमोचन तीर्थ के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी तट पर सात तीर्थ पुरोहित श्राद्धकर्म करा रहे हैं। यहां अप्रेत श्राद्ध, प्रेत श्राद्ध, अकाल मृत्यु और पितृ श्राद्ध की विधियां संपन्न कराई जा रही हैं। कर्मकांड के बाद पिंडदानी 84 लाख योनियों से मुक्ति के प्रतीक स्वरूप 84 प्रकार के दान और 84 प्रकार की दक्षिणा अर्पित करने का संकल्प लेते हैं।