पितृपक्ष 2026 : पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए पिशाचमोचन तीर्थ पर उमड़ी भीड़, देश-विदेश से पहुंचे आस्थावान
पितरों की शांति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध और पिंडदान, 14 दिनों तक मंत्रोच्चार के साथ चलता रहेगा श्राद्ध कर्म
वाराणसी। पितृपक्ष के शुभारंभ के साथ ही मोक्ष की नगरी काशी के प्रसिद्ध पिशाचमोचन तीर्थ पर रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न किए। सुबह से ही पिशाचमोचन मंदिर और कुंड परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा।
पितृपक्ष में अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्रद्धालु यहां विधि-विधान से कर्मकांड करा रहे हैं। कुंड के आसपास अलग-अलग स्थानों पर पुरोहितों के निर्देशन में त्रिपिंडी श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध और पिंडदान की प्रक्रिया चलती रही। श्रद्धालुओं ने पितरों की शांति और तृप्ति की कामना के साथ तर्पण किया। कई परिवारों ने पूर्वजों के निमित्त विशेष श्राद्ध कर्म भी कराया।
14 दिनों तक चलेगा पितृपक्ष
पिशाचमोचन मंदिर के महंत पंडित मुन्ना लाल पंडा के पुत्र पंडित नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि इस वर्ष पितृपक्ष 14 दिनों का है और 10 अक्टूबर तक चलेगा। अलग-अलग तिथियों पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करेंगे। उन्होंने बताया कि पिशाचमोचन तीर्थ पर पितृ कर्म के लिए विशेष धार्मिक मान्यता है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां त्रिपिंडी श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध और गया श्राद्ध का संकल्प लेकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराते हैं।
देश के विभिन्न राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु
पितृपक्ष के अवसर पर उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने का सिलसिला जारी है। विदेशों में रहने वाले सनातन धर्मावलंबी भी अपने पूर्वजों के निमित्त पिशाचमोचन तीर्थ पर धार्मिक अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।
आस्था के साथ परंपरा का निर्वहन
पिशाचमोचन तीर्थ पर सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां तेज रहीं। कहीं पिंडदान तो कहीं तर्पण और श्राद्ध कर्म चलता रहा। पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु अपने पितरों का स्मरण करते नजर आए। मंदिर परिसर में भी पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा। पितृपक्ष के दौरान पिशाचमोचन तीर्थ श्रद्धालुओं के लिए आस्था, परंपरा और पूर्वजों के स्मरण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।