डोमरी में विकसित हो रहा ‘ऑक्सीजन हब’, हर माह 35 हजार लीटर जीवामृत से सघन वन को मिलेगा पोषण

डोमरी सूजाबाद क्षेत्र में विकसित किए जा रहे शहरी वन परियोजना में अब पौधरोपण के साथ-साथ वैज्ञानिक देखभाल और मिट्टी की उर्वरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां लगाए गए 2.51 लाख पौधों को स्वस्थ और सघन जंगल का स्वरूप देने के लिए हर महीने 35,000 लीटर ‘जीवामृत’ का छिड़काव किया जाएगा।
 

वाराणसी। डोमरी सूजाबाद क्षेत्र में विकसित किए जा रहे शहरी वन परियोजना में अब पौधरोपण के साथ-साथ वैज्ञानिक देखभाल और मिट्टी की उर्वरता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां लगाए गए 2.51 लाख पौधों को स्वस्थ और सघन जंगल का स्वरूप देने के लिए हर महीने 35,000 लीटर ‘जीवामृत’ का छिड़काव किया जाएगा।

बंजर और अनुपजाऊ मानी जाने वाली मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए बड़े स्तर पर ‘मिट्टी रिपेयरिंग’ अभियान चलाया गया है। इसके तहत चार फीट गहरी खुदाई कर लगभग 100 टन कोकोपीट और 250 टन गोबर की खाद का वैज्ञानिक मिश्रण तैयार कर भूमि में डाला गया है। इस प्रक्रिया से मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाई गई है, जिससे पौधों की जड़ों को पर्याप्त पोषण मिल सके।

मियावाकी पद्धति के विशेषज्ञ विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, शुरुआती छह महीनों तक नियमित रूप से जीवामृत का छिड़काव किया जाएगा, जबकि अगले दो वर्षों तक अंतराल पर यह प्रक्रिया जारी रहेगी। जीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाता है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से फैलती और मजबूत होती हैं। वर्तमान में वसंत ऋतु के कारण पत्तों का झड़ना स्वाभाविक है, जिसे अक्सर लोग पौधों के सूखने के रूप में समझ लेते हैं, जबकि अंदरूनी स्तर पर उनकी जड़ें मजबूत हो रही हैं।

सिंचाई व्यवस्था को भी अत्याधुनिक बनाया गया है। गर्मियों में जल संकट से निपटने के लिए परिसर में चार विशेष तालाब बनाए जाएंगे, जो भूजल स्तर बनाए रखने और आपातकालीन सिंचाई में सहायक होंगे। इसके अलावा दस बोरवेल स्थापित किए गए हैं। पानी की बचत के लिए ड्रिप (टपक) और स्प्रिंकलर सिस्टम को एक साथ लागू किया गया है, जिससे पौधों को संतुलित नमी मिलती रहे और उनकी प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित न हो।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से पांच गार्डों की तैनाती की गई है। साथ ही पर्यावरण प्रेमियों के लिए योग स्थल विकसित करने की योजना भी है। जामुन, आंवला, नीम और अर्जुन सहित 35 प्रजातियों के पौधों से तैयार हो रहा यह सघन वन आने वाले समय में वाराणसी के पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना शहर को एक सशक्त ‘ऑक्सीजन हब’ के रूप में स्थापित करेगी।