सर्वपितृ अमावस्या पर काशी के गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, पितरों की आत्मशांति के लिए किया तर्पण-पिंडदान

वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पितृपक्ष के अंतिम दिन दशाश्वमेध, अस्सी और तुलसी घाट सहित विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना लेकर पहुंचे। भोर से ही श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया। घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण किया। इस दौरान किसी ने मुंडन संस्कार कराया तो किसी ने अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान कर पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
 

वाराणसी। धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पितृपक्ष के अंतिम दिन दशाश्वमेध, अस्सी और तुलसी घाट सहित विभिन्न घाटों पर हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना लेकर पहुंचे। भोर से ही श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया। घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण किया। इस दौरान किसी ने मुंडन संस्कार कराया तो किसी ने अन्न, वस्त्र और दक्षिणा दान कर पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

भोर साढ़े तीन बजे से घाटों पर शुरू हो गए अनुष्ठान

सर्वपितृ अमावस्या पर काशी के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला तड़के ही शुरू हो गया था। अस्सी घाट पर तीर्थ पुरोहितों और बटुकों की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और पिंडदान किया। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार मुंडन संस्कार भी कराया।

तीर्थ पुरोहित बटुक महाराज ने बताया कि सुबह लगभग साढ़े तीन बजे से ही श्रद्धालुओं का घाटों पर पहुंचना शुरू हो गया था। इसके साथ ही तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध के धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो गए। पितृपक्ष के अंतिम दिन बड़ी संख्या में लोगों ने अपने पूर्वजों की आत्मशांति और सद्गति की कामना के साथ धार्मिक कर्मकांड संपन्न कराए।

पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष दिन

तीर्थ पुरोहित बटुक महाराज ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

मान्यता है कि पितरों के निमित्त किए गए धार्मिक अनुष्ठानों से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करता है। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर पहुंचकर अपने पूर्वजों को याद किया।

दशाश्वमेध घाट पर भी उमड़ी भीड़, घर पर पूजा करने का बताया महत्व

दशाश्वमेध घाट पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। यहां तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में लोगों ने गंगा स्नान के बाद तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया।

तीर्थ पुरोहित विशाल शास्त्री ने बताया कि पितृ अमावस्या पितृपक्ष का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

उन्होंने बताया कि जो लोग किसी कारणवश गंगा घाट तक नहीं पहुंच सकते, वे अपने घर पर भी माता-पिता और पूर्वजों का स्मरण कर पूजा-पाठ कर सकते हैं। इसके साथ ही तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जा सकती है।

घाटों पर पुलिस रही मुस्तैद, श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर

सर्वपितृ अमावस्या पर गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। दशाश्वमेध घाट और आसपास के प्रमुख मार्गों पर पुलिस एवं सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।

गंगा के बढ़े जलस्तर और घाटों तक पहुंचने वाली संकरी गलियों को देखते हुए श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित बनाए रखने का प्रयास किया गया। पुलिसकर्मी घाटों और संपर्क मार्गों पर निगरानी करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी न हो।

गंगा घाटों पर दिखा आस्था और परंपरा का संगम

पितृपक्ष के समापन के अवसर पर काशी के गंगा घाटों पर धार्मिक आस्था और परंपरा का विशेष वातावरण देखने को मिला। घाटों पर कहीं पुरोहित मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान करा रहे थे तो कहीं श्रद्धालु हाथों में गंगाजल लेकर अपने पूर्वजों का तर्पण कर रहे थे।

श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मशांति और सद्गति की प्रार्थना करने के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस तरह सर्वपितृ अमावस्या पर काशी के गंगा घाट पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के साक्षी बने।