हनुमान जयंती के अवसर पर संकट मोचन में उमड़ा भक्तों का रेला, साल में एक बार होने वाली दिव्य झांकी के दर्शन कर निहाल हुए भक्त
विधि-विधान से पूजन और भव्य आरती के बाद खुले मंदिर के पट
महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने वितरित किया प्रसाद, बनकटी, पंचमुखी और अन्य हनुमान मंदिरों में भी रही भक्तों की भीड़
वाराणसी। काशी में हनुमान जयंती का पर्व रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। नगवा स्थित प्रसिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर में बजरंगबली की विशेष झांकी के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। साल में एक बार होने वाली इस विशेष झांकी के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई थी। विधि-विधान से पूजन-अर्चन और भव्य आरती के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इसके बाद जय श्रीराम और जय हनुमान के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
हनुमान जयंती पर संकट मोचन मंदिर को फूलों और आकर्षक सजावटी सामग्री से भव्य रूप से सजाया गया था। बजरंगबली का विशेष शृंगार किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। काशी के अलावा आसपास के जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा का दर्शन किया और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना की। पूरे दिन मंदिर में भक्तों का आवागमन जारी रहा।
विशेष आरती के बाद महंत ने बांटा प्रसाद
मंदिर में सुबह पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। बजरंगबली की विशेष आरती उतारने के बाद दर्शन-पूजन शुरू हुआ। मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया। भक्तों ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ कर बजरंगबली की आराधना की। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
अन्य मंदिरों में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हनुमान जयंती पर दुर्गाकुंड स्थित बनकटी हनुमान मंदिर और पंचमुखी हनुमान मंदिर में भी विशेष पूजन-अर्चन और धार्मिक आयोजन हुए। नगवा स्थित बड़े हनुमान मंदिर, मैदागिन के शांतिकरण हनुमान मंदिर समेत शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। फूलों से सजे मंदिरों में सुबह से देर शाम तक भक्तों की आवाजाही बनी रही।
विशेष लग्न में हुई हनुमत आराधना
ज्योतिषाचार्य पं. विकास शास्त्री के अनुसार मेष लग्न में हनुमत जयंती का विशेष पूजन शाम 4:36 से 6:15 बजे तक निर्धारित था। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा की। धार्मिक परंपरा के अनुसार बजरंगबली को तिल के तेल में सिंदूर मिलाकर अर्पित किया गया। पुष्पमाला से शृंगार कर मोदक, चूरमा और ऋतुफल का भोग लगाया गया।
इसी दिन नरक चतुर्दशी का पर्व भी मनाया गया। शाम को यमराज के निमित्त घरों के बाहर चार बत्तियों वाले दीपक जलाकर यम दीपदान किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस तरह हनुमान जयंती पर काशी के मंदिरों से लेकर घरों तक भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा।