गंगा दशहरा पर काशी हुई भक्तिमय, अस्सी घाट पर मां गंगा प्राकट्य उत्सव में उमड़ा जनसैलाब

गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित भव्य मां गंगा प्राकट्य उत्सव ने श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेर दी। अस्सी घाट पर आयोजित इस विशाल आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माँ गंगा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। पूरा घाट क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय माँ गंगे” के जयघोषों से देर रात तक गुंजायमान रहा।
 

वाराणसी। गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित भव्य मां गंगा प्राकट्य उत्सव ने श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेर दी। अस्सी घाट पर आयोजित इस विशाल आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माँ गंगा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। पूरा घाट क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय माँ गंगे” के जयघोषों से देर रात तक गुंजायमान रहा।

ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास, काशी एवं श्रीकुल पीठ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दुग्धाभिषेक और माँ गंगा के विशेष पूजन के साथ हुआ। आयोजन की सबसे आकर्षक झलक तब देखने को मिली जब देश के विभिन्न राज्यों से लाई गई 5100 साड़ियों से माँ गंगा को भव्य चुनरी अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने इसे सनातन संस्कृति और भक्ति का अनूठा प्रतीक बताया। इसके अलावा 56 परिवारों द्वारा 56 प्रकार के भोग अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई।

घाट पर दीपों की जगमगाहट, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रों की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। श्रद्धालुओं ने गंगा आरती, भजन-संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। देर रात तक चले इस आयोजन में भक्तों ने आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता का अनुभव किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिंद्रनाथ महाराज ने कहा कि माँ गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि गंगा की स्वच्छता और संरक्षण का संकल्प लेने का अवसर भी है।

समाजसेवी अश्वनी शुक्ला ने लोगों से गंगा को स्वच्छ रखने की अपील करते हुए कहा कि माँ गंगा सदियों से मानवता का कल्याण कर रही हैं और उनका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते गंगा संरक्षण को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां इसका दुष्परिणाम भुगतेंगी।

वहीं दुर्गा मंदिर के महंत कौशलपति द्विवेदी ने आयोजन को अलौकिक बताते हुए कहा कि इस दिव्य क्षण का साक्षी बनना सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से रंगोली, चित्रकला, शास्त्रीय नृत्य और भजन-गायन प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।

महोत्सव का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब मंच से घोषणा की गई कि पीएम मोदी को पहली बार “गंगा भगीरथ विश्वगुरु काशी सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार काशी के आध्यात्मिक पुनर्जागरण, गंगा स्वच्छता और घाटों के विकास में योगदान के लिए यह सम्मान दिया जाएगा।

इसके साथ ही गंगा संरक्षण और सामाजिक सेवा से जुड़े कई लोगों को विभिन्न सम्मान प्रदान किए गए। वहीं कल्की महाराज को श्रीकुल पीठ की ओर से “जगतगुरु” की उपाधि दिए जाने की घोषणा होते ही पूरा घाट तालियों और जयघोषों से गूंज उठा।