चैत्र नवरात्र की नवमी को श्री काशी विश्वनाथ धाम में सांस्कृतिक संध्या का समापन, भक्ति और संगीत का दिखा अद्भुत संगम
वाराणसी। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित नौ दिवसीय सांस्कृतिक संध्या श्रृंखला का समापन भव्य और गरिमामय माहौल में हुआ। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर भक्ति, संगीत और नृत्य की सुरमयी प्रस्तुतियों से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे आयोजन के दौरान गहरे आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया, वहीं “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा धाम गूंजता रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत बसाक सिस्टर्स, विशेषकर पूजा बसाक द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों से हुई। उनकी भावपूर्ण गायकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। इसके बाद डॉ. रेवती साकलकर ने अपनी भजन प्रस्तुति से वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया, जिससे श्रोताओं का मन श्रद्धा से भर उठा।
सांस्कृतिक संध्या के अगले चरण में एक ख्यातिलब्ध सरोद वादक द्वारा सरोद वादन प्रस्तुत किया गया। उनकी मधुर और मनमोहक स्वर लहरियों ने पूरे परिसर को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात पंडित रोहित मिश्र और उनके समूह ने भजन गायन प्रस्तुत किया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और माहौल को भक्तिमय बनाए रखा।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. रंजना उपाध्याय एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य ने आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की। उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और कलात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम का संचालन प्रखर वक्ता मीनाक्षी दीक्षित ने किया। उनकी प्रभावशाली और ओजस्वी वाणी ने कार्यक्रम को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया और सभी प्रस्तुतियों को एक सूत्र में बांधकर रखा।
धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या श्रृंखला चैत्र नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन आयोजित की गई। नवमी के इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही और पूरा वातावरण श्रद्धा, भक्ति तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।