चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मां श्रृंगार गौरी के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, हिंदू पक्ष की वादिनी महिलाओं ने भी किया दर्शन-पूजन, निकाली कलश यात्रा
वाराणसी। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन ज्ञानवापी स्थित माता श्रृंगार गौरी के दर्शन को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हिंदू पक्ष की वादिनी महिलाओं ने भी माता का दर्शन-पूजन किया। इस अवसर कलश यात्रा निकाली गई। भक्तों ने माता के दर्शन-पूजन कर ज्ञानवापी मुक्ति की कामना की। इस दौरान इसके समर्थन में नारे भी लगाए। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। साल में एक बार ही प्रशासन की ओर से माता श्रृंगार गौरी के दर्शन की अनुमति प्रदान की जाती है।
इस अवसर पर श्री आदि विश्वेश्वर मुक्ति विद्वत मंच की ओर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा में शामिल श्रद्धालु धार्मिक उत्साह के साथ भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े और मां श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन किए। यात्रा ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। मां श्रृंगार गौरी का मंदिर ज्ञानवापी परिसर में स्थित है, जो लंबे समय से विवादों में रहा है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी और बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे।
ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस की याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी ने कहा कि चैत्र नवरात्र के चौथे दिन माता का दर्शन-पूजन होता है। मैदागिन से शोभायात्रा निकालकर मां का दर्शन-पूजन किया। माता से यही कामना है कि जल्द से जल्द श्री आदि विश्वेश्वर के धाम का उद्धार हो। ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के वादी डॉ. सोहनलाल आर्य ने कहा कि 1984 से ज्ञानवापी मुक्ति का संकल्प लेकर मां श्रृंगार गौरी का दर्शन-पूजन करते चले आ रहे हैं। 18 अप्रैल 1669 में आदि विश्वेश्वर का भव्य मंदिर तोड़ दिया गया था, उसका उद्घार होना चाहिए। इसके लिए तभी से हिंदू समाज संघर्षरत है। इसके लिए अदालत में मुकदमा भी दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि कमीशन और एएसआई के सर्वे में यह स्पष्ट हो चुका है कि यह मंदिर ही है। इसको लेकर हमसभी सुप्रीम कोर्ट तक गए। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि प्रशासन द्वारा बिना किसी कारण मां श्रृंगार गौरी के दर्शन की अनुमति साल में सिर्फ एक ही दिन दी जाती है। जबकि हर मंदिर में रोजाना दर्शन-पूजन, राग-भोग लगता है। हालांकि श्रृंगार गौरी मंदिर में बिना किसी कारण के दर्शन-पूजन रोक दिया गया। साल में सिर्फ एक दिन ही चैत्र नवरात्र की चतुर्थी तिथि को दर्शन की अनुमति मिलती है। बाबा और मां की मुक्ति के लिए ही कामना की।