सावन के पहले सोमवार को शिवमय हुई काशी, बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ा भक्तों का सैलाब, तीन किलोमीटर लंबी कतार
श्रद्धालु और कांवड़ियों का पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर इंतजाम
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने शिव भक्तों पर बरसाए फूल
मंगला आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला गया मंदिर का कपाट, "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंजा पूरा धाम
दर्शन के लिए छह प्रवेश द्वारों से भक्तों की एंट्री, जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर, हेल्प डेस्क और पेयजल की व्यवस्था
गंगा घाटों पर जल पुलिस, एनडीआरएफ और गोताखोर तैनात, बढ़े जलस्तर के चलते बैरिकेडिंग के भीतर स्नान और जल भरने के निर्देश
सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की निगरानी, कांवड़ियों के लिए अलग रूट निर्धारित, वेश बदलकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई
वाराणसी। महादेव को प्रिय सावन मास के पहले सोमवार को धर्मनगरी काशी पूरी तरह शिवमय नजर आई। सावन के पहले सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में भगवान श्री विश्वेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंगला आरती के उपरांत बाबा काशी विश्वनाथ का दरबार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया, जिसके बाद "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से पूरा धाम गूंज उठा। बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की लगभग तीन किलोमीटर लंबी कतार लगी है। धाम में भक्तों का स्वागत पुष्प वर्षा के साथ किया गया।
मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शनार्थियों का भव्य स्वागत किया गया। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा, डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार तथा मंदिर प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं और कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया।
दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन ने छह प्रमुख प्रवेश द्वार निर्धारित किए। भारी भीड़ के चलते करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार में श्रद्धालु और कांवरिये बाबा के दर्शन के लिए धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। प्रशासन द्वारा कतार व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई।
गंगा के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए घाटों पर विशेष सतर्कता बरती गई। जल पुलिस, एनडीआरएफ और गोताखोरों की तैनाती की गई है। घाटों पर बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को केवल सुरक्षित क्षेत्र में स्नान और जलभराव करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। सभी घाटों पर अलाउंसमेंट के माध्यम से लगातार सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रसारित की जा रही है।
पूरे क्षेत्र में पुलिस प्रशासन चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रहा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए हैं कि वे श्रद्धालुओं और कांवरियों से सम्मानपूर्वक "सर" और "मैडम" कहकर संवाद करें तथा उनकी हरसंभव सहायता करें।
प्रयागराज संगम से आने वाले कांवड़ियों के लिए निर्धारित मार्ग पर स्वास्थ्य शिविर, हेल्प डेस्क, पेयजल और खान-पान की विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि कांवड़ियों का वेश धारण कर अराजकता फैलाने या अनुचित गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।