पितृपक्ष के पहले दिन काशी के घाटों पर उमड़े आस्थावान, गंगा स्नान कर पितरों के लिए किया तर्पण
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, दशाश्वमेध से पंचगंगा और पिशाचमोचन तक श्राद्ध-पिंडदान शुरू
वाराणसी। पितृपक्ष के शुभारंभ के साथ ही धर्म और आस्था की नगरी काशी में गंगा घाटों का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। पितरों की शांति और मोक्ष की कामना लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु काशी पहुंचे। रविवार सुबह से ही दशाश्वमेध, अस्सी, केदारघाट, पंचगंगा समेत प्रमुख घाटों पर पिंडदानी परिवारों की भीड़ जुटने लगी। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद तीर्थ पुरोहितों की देखरेख में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म संपन्न कराया। करीब 14 दिनों तक पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहेगा।
घाटों पर सुबह से ही हाथों में पूजा सामग्री और पिंड लेकर श्रद्धालु पहुंचते रहे। तीर्थ पुरोहितों ने विधि-विधान के साथ कर्मकांड कराया। कई परिवारों ने दिवंगत माता-पिता और अन्य परिजनों की स्मृति में विशेष श्राद्ध और पिंडदान कराया। मंत्रोच्चार से गंगा तट का वातावरण धार्मिक हो गया।
संकल्प के साथ शुरू होती है तर्पण की प्रक्रिया
तीर्थ पुरोहित बटुक महाराज ने बताया कि श्राद्ध और पिंडदान की प्रक्रिया संकल्प से शुरू होती है। श्रद्धालु पवित्र जल हाथ में लेकर पितरों का नाम, गोत्र और अन्य आवश्यक विवरण लेते हुए संकल्प करता है। इसके बाद तर्पण और पिंडदान की विधियां पूरी की जाती हैं। पितरों की शांति और मुक्ति की कामना के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
तीन घंटे तक चलता है कर्मकांड
काशी में विभिन्न स्थानों पर होने वाला श्राद्ध कर्म सामान्य तौर पर करीब तीन घंटे में पूरा होता है। इसमें संकल्प, तर्पण, पिंडदान, पूजा-अर्चना, कथा श्रवण और दान-दक्षिणा समेत कई प्रक्रियाएं शामिल रहती हैं। कर्मकांड के अंतिम चरण में पीपल को जल अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके बाद श्रद्धालु भगवत कथा का श्रवण करते हैं।
पिशाचमोचन में भी शुरू हुआ श्राद्ध
गंगा घाटों के अलावा पिशाचमोचन क्षेत्र में भी पितृ कर्मकांड शुरू हो गया है। यहां विभिन्न प्रकार के श्राद्ध कराने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कई परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों के निमित्त कर्मकांड के लिए तीर्थ पुरोहितों से संपर्क किया है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान भी कर रहे हैं।
बढ़ा जलस्तर, घाटों पर सावधानी
गंगा का जलस्तर बढ़ा होने के कारण कुछ घाटों पर उपलब्ध स्थान सीमित हो गया है। कई सीढ़ियों तक पानी पहुंचने से श्रद्धालुओं को स्नान और तर्पण के दौरान सावधानी बरतनी पड़ रही है। इसके बावजूद पितरों के प्रति आस्था लोगों को गंगा तट तक खींच ला रही है। उत्तर प्रदेश के अलावा विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण घाटों और धार्मिक स्थलों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। पितृपक्ष आगे बढ़ने के साथ काशी में पिंडदान और श्राद्ध के लिए श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।