रंगभरी एकादशी पर काशी-मथुरा का आध्यात्मिक संगम, पावन उपहारों से सुदृढ़ हुए संबंध

रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर काशी और मथुरा के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई मिली। 26 फरवरी को मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान से श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए प्रेषित पावन उपहार 27 फरवरी  को विधिवत रूप से प्राप्त किए गए। यह अवसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा।
 

वाराणसी। रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर काशी और मथुरा के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई मिली। 26 फरवरी को मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान से श्री काशी विश्वनाथ धाम के लिए प्रेषित पावन उपहार 27 फरवरी  को विधिवत रूप से प्राप्त किए गए। यह अवसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा।

रंगभरी एकादशी के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत मथुरा से आए प्रतिनिधिमंडल ने श्रद्धा-भेंट को श्री विश्वेश्वर के पावन प्रांगण में समर्पित किया। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजन संपन्न हुआ। इस दौरान देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति तथा जनकल्याण के लिए मंगलकामनाएं की गईं।

कार्यक्रम में गोपेश्वर चतुर्वेदी, शैलजाकान्त मिश्र सहित अन्य गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा परिसर भक्ति भाव से सराबोर रहा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्री कृष्ण जन्मस्थान न्यास एवं उसके सचिव कपिल शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। न्यास ने कहा कि इस अभिनव सांस्कृतिक पहल को मथुरा में भी प्रभावी रूप से लागू कर दोनों पवित्र धामों के बीच आध्यात्मिक संवाद को और मजबूत किया गया है।

यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान काशी और मथुरा जैसे दो महान धार्मिक केंद्रों के मध्य परंपरागत संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन न केवल धार्मिक एकता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी सशक्त बनाते हैं।