काशी विश्वनाथ धाम में महानवमी पर हवन-पूजन, कन्या पूजन से दिया नारी शक्ति के सम्मान का संदेश

शारदीय नवरात्र की महानवमी पर सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ हवन-पूजन एवं कन्या पूजन संपन्न हुआ। इस दौरान मां आदिशक्ति की आराधना कर लोक कल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और समाज में सद्भाव की कामना की गई। मंदिर न्यास की ओर से मां विशालाक्षी के लिए श्रृंगार सामग्री भी बाबा श्री विश्वेश्वर के समक्ष विधिवत अवलोकित कराने के बाद प्रेषित की गई।
 

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान, मां विशालाक्षी को अर्पित की गई श्रृंगार सामग्री; नवदुर्गा सप्तशती का हुआ पाठ

वाराणसी। शारदीय नवरात्र की महानवमी पर सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ हवन-पूजन एवं कन्या पूजन संपन्न हुआ। इस दौरान मां आदिशक्ति की आराधना कर लोक कल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और समाज में सद्भाव की कामना की गई। मंदिर न्यास की ओर से मां विशालाक्षी के लिए श्रृंगार सामग्री भी बाबा श्री विश्वेश्वर के समक्ष विधिवत अवलोकित कराने के बाद प्रेषित की गई।

धाम स्थित मंदिर चौक में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सत्यम मिश्र यजमान के रूप में शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन संपन्न कराया गया। इसके बाद विधि-विधान से कन्या पूजन किया गया। सनातन परंपरा में कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इस अनुष्ठान के माध्यम से नारी शक्ति के सम्मान और आदिशक्ति के प्रति श्रद्धा का संदेश दिया गया।

नवदुर्गा सप्तशती के पाठ से हुआ देवी महात्म्य का स्मरण
महानवमी के अवसर पर नवदुर्गा सप्तशती का पाठ कर मां भगवती के महात्म्य का स्मरण किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान समस्त जगत के कल्याण, परिवारों की खुशहाली और जनमानस के जीवन में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना की गई।

काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में शिव और शक्ति की आराधना का विशेष महत्व है। इसी परंपरा के अनुरूप श्री काशी विश्वनाथ धाम में नवरात्र के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों का विधिवत आयोजन किया गया। महानवमी पर संपन्न हवन, पूजन और कन्या पूजन ने श्रद्धा, सेवा, करुणा और आध्यात्मिक चेतना के महत्व को रेखांकित किया।