ODOP योजना से गुलाबी मीनाकारी को मिली नई उड़ान, कारीगरों के लिए खुले अंतरराष्ट्रीय बाजार
वाराणसी। पारंपरिक कला को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना का सकारात्मक प्रभाव अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इस योजना के तहत वाराणसी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी कला को न सिर्फ नई पहचान मिली है, बल्कि कारीगरों के लिए रोजगार और बाजार के नए अवसर भी खुले हैं।
गुलाबी मीनाकारी के कारीगर रोहन शर्मा बताते हैं कि वे वर्षों से इस पारंपरिक कला से जुड़े हुए हैं और छोटे-बड़े हर प्रकार के मीनाकारी उत्पाद तैयार करते हैं। उनका कहना है कि नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की पहल से इस कला को नया जीवन मिला है। पहले यह कला धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच रही थी, लेकिन अब इसकी मांग देश-विदेश तक बढ़ चुकी है।
कारीगर के अनुसार, उनके द्वारा बनाए गए विशेष उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने दावा किया कि उनके एक उत्पाद को प्रधानमंत्री द्वारा पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति को उपहार स्वरूप दिया गया। इसके अलावा उनके बनाए उत्पाद दुबई के संग्रहालय तक पहुंच चुके हैं और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को भी उनकी कला भेंट की जा चुकी है।
रोहन शर्मा बताते हैं कि वर्ष 2015-16 के आसपास गुलाबी मीनाकारी की स्थिति काफी खराब थी। उस समय न तो बाजार था और न ही लोगों में इसकी खास जानकारी। लेकिन ODOP योजना के लागू होने के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। अब जहां भी मीनाकारी के स्टॉल लगाए जाते हैं, लोग खुद इस कला को देखने और खरीदने के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब ग्राहक खुद उनके घर और कार्यस्थल पर आकर ऑर्डर देते हैं। कस्टमाइज्ड ज्वेलरी, सजावटी सामान और पारंपरिक डिजाइन की मांग तेजी से बढ़ी है।
सरकार द्वारा इस कला को बढ़ावा देने के लिए मीनाकारी उत्पादों को विशेष उपहार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। पीकॉक और गणेश आकृतियों वाले उत्पाद मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों को भेंट किए जाते हैं। कारीगरों का मानना है कि ODOP योजना ने न सिर्फ उनकी कला को पुनर्जीवित किया है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया है। अब गुलाबी मीनाकारी एक बार फिर वाराणसी की पहचान बनकर उभर रही है।