मानसून में खिली नर्सरियां, लाल-गुलाबी आम और हाइब्रिड फलदार पौधों की बढ़ी मांग
कम जगह में फल देने वाले पौधे शहरवासियों की पहली पसंद, वाराणसी से सात राज्यों में हो रही आपूर्ति
50 से अधिक देसी और हाइब्रिड आम की किस्में बाजार में उपलब्ध, 1 से 3 वर्ष में फल देने वाले हाइब्रिड पौधों की मांग सबसे ज्यादा
वाराणसी की नर्सरियों से 7 राज्यों में पौधों की आपूर्ति, आम के पौधे ₹120 से ₹1200, अन्य फलदार पौधों की ₹30 से ₹300 तक में बिक्री
शहरों में हाइब्रिड और गांवों में देसी किस्मों को प्राथमिकता, बारिश रातरानी, बोगनवेलिया, गंधराज, बेला और चमेली जैसे पौधों की बिक्री बढ़ी
वाराणसी। मानसून की दस्तक के साथ वाराणसी की नर्सरियों में एक बार फिर रौनक लौट आई है। हरियाली बढ़ाने और सीमित जगह में बागवानी करने की बढ़ती रुचि के चलते शहरवासी अब हाइब्रिड और जल्दी फल देने वाले पौधों को प्राथमिकता दे रहे हैं। लाल, गुलाबी, बैंगनी, सिंदूरी और जापानी मियाजाकी आम जैसे आकर्षक फलों के पौधे इन दिनों सबसे अधिक बिक रहे हैं।
नर्सरी संचालक सुरेंद्र मौर्या, गोपाल और सुरेश के अनुसार, मानसून शुरू होते ही पौधों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। शहरों में रहने वाले लोग अब छोटे भूखंडों और घरों की सीमित जगह में भी फलदार पौधे लगाने लगे हैं, जबकि कई लोग शहर से बाहर जमीन खरीदकर बाग विकसित कर रहे हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी किसान बनारसी लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली जैसी पारंपरिक किस्मों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं।
नर्सरी संचालकों का कहना है कि आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आम, अमरूद, अनार सहित कई ऐसे हाइब्रिड पौधे तैयार किए गए हैं, जो कम जगह घेरते हैं और एक से तीन वर्षों के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं। बाजार में रेड डायमंड, ब्लैक डायमंड, ताइवान पिंक अमरूद, जापानी मियाजाकी, सिंदूरी और बैंगनी रंग के आमों की विशेष मांग बनी हुई है।
वाराणसी की नर्सरियों से केवल पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली और राजस्थान सहित सात राज्यों में भी फलदार एवं सजावटी पौधों की आपूर्ति की जा रही है। इस वर्ष बाजार में आम की 50 से अधिक देसी और हाइब्रिड किस्में उपलब्ध हैं। इनमें अंबिका, अरुणिका, अरुणिमा, प्रतिमा, सूर्या, स्वर्ण रेखा, मलिका, सेंसेशन, जापानी मियाजाकी, रेड आइवरी के साथ बनारसी लंगड़ा, दशहरी, चौसा, सिंदूरी और काला पहाड़ जैसी पारंपरिक किस्में भी शामिल हैं। इसके अलावा सेब, अमरूद, लीची, संतरा, अनार, पपीता, बेल, केला, करौंदा और आंवला की उन्नत किस्मों के पौधों की भी अच्छी मांग है।
बरसात के मौसम में फलदार पौधों के साथ सजावटी और सुगंधित पौधों की बिक्री भी तेज हो गई है। रातरानी, बोगनवेलिया, गंधराज, मुसांडा, कामिनी, सोनचंपा, बेला, चमेली और रजनीगंधा जैसे पौधे लोगों की पसंद बने हुए हैं। नर्सरी संचालकों के अनुसार पौधों की कीमत उनकी किस्म और उम्र के आधार पर तय होती है। आम के पौधे 120 से 1200 रुपये, अमरूद 50 से 300 रुपये तथा अन्य फलदार पौधे 30 से 300 रुपये तक उपलब्ध हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और पौधरोपण के लिए अनुकूल मानसून के कारण इस वर्ष पौधों की मांग पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ी है।