कुंभा महादेव मंदिर में किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं, मंदिर पूरी तरह सुरक्षित: पुलिस कमिश्नर
वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल की गई एक तस्वीर को लेकर फैली अफवाहों पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में सामने आया है कि मंदिर तोड़े जाने का दावा करने वाली तस्वीर AI जनरेटेड थी और वास्तविकता से उसका कोई संबंध नहीं था। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे और मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि कुंभा महादेव मंदिर में किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं हुई है और मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है।
वायरल तस्वीर का दावा झूठा, जांच में खुलासा
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लेकर यह दावा किया गया था कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य के दौरान एक मंदिर तोड़ दिया गया। जांच में यह तस्वीर कुंभा महादेव मंदिर की बताई गई, लेकिन पुलिस की तकनीकी और स्थल जांच में स्पष्ट हुआ कि तस्वीर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई थी। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने मंदिर की वास्तविक स्थिति दिखाई और बताया कि मंदिर में नियमित पूजा होती है तथा श्रद्धालु रोज दर्शन करते हैं।
विश्वनाथ कॉरिडोर में स्थित है कुंभा महादेव मंदिर
पुलिस के अनुसार कुंभा महादेव मंदिर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर क्षेत्र में स्थित है। कॉरिडोर निर्माण के समय यह मंदिर सामने आया था और तभी से इसे संरक्षित रखा गया है। आज भी यहां पूजा-पाठ और दर्शन निर्बाध रूप से जारी हैं।
आठ लोगों पर मुकदमा, 72 घंटे में स्पष्टीकरण का अल्टीमेटम
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में थाना चौक थाना में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों को 72 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का समय दिया गया है, अन्यथा गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है। उन्होंने साफ कहा कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा और सबसे पहले यह पता लगाया जा रहा है कि AI के जरिए तस्वीर किसने बनाई।
साजिश की आशंका, अन्य मामलों से कनेक्टिविटी की जांच
पुलिस कमिश्नर ने यह भी कहा कि दालमंडी क्षेत्र में चल रहे काम और मणिकर्णिका घाट को लेकर एक साथ तस्वीरें वायरल होना संदेह पैदा करता है। इन घटनाओं की आपसी कनेक्टिविटी की जांच की जा रही है और यदि साजिश के ठोस सबूत मिलते हैं तो कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक हस्तियों के नाम भी एफआईआर में
पुलिस ने बताया कि वायरल तस्वीर के मामले में राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव समेत आठ लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं। जांच के दायरे में वे सभी लोग भी हैं जिन्होंने तस्वीर को साझा किया या भ्रामक दावे को आगे बढ़ाया।
स्पष्ट संदेश: अफवाह फैलाने वालों पर सख्ती
पुलिस प्रशासन ने दो टूक कहा है कि मणिकर्णिका घाट जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल को लेकर अफवाह फैलाना गंभीर अपराध है। AI जनरेटेड सामग्री के जरिए समाज में भ्रम और तनाव पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।